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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों को तीन नवंबर को आयोजित की गई विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में शामिल करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमित पदों पर नियुक्त सहायक अध्यापकों और शिक्षामित्रों की सेवा की प्रकृति व स्थिति पूरी तरह अलग-अलग है।
कोर्ट ने कहा कि दोनों संवर्गों में भिन्नता होने के चलते विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल न करने को भेदभाव नहीं माना जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने शिक्षामित्रों को टीईटी पास करने के लिए पर्याप्त अवसर देने के उद्देश्य से राज्य सरकार और उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग को 31 अगस्त 2028 तक कम से कम छह नियमित टीईटी कराने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह व न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वसीम अहमद की विशेष अपील पर दिया। अपील में एकल पीठ के एक अक्तूबर 2026 के आदेश को चुनौती दी गई थी। एकल पीठ के समक्ष दाखिल याचिका में विशेष टीईटी परीक्षा में केवल कार्यरत शिक्षकों और संविदा पर कार्यरत विशेष शिक्षकों को शामिल करने के शासनादेश व जारी विज्ञापन को चुनौती दी गई थी।
अपीलकर्ताओं का कहना था कि विशेष शिक्षकों को संविदा पर होने के बावजूद टीईटी में शामिल होने का अवसर दिया गया है, जबकि शिक्षामित्रों को इससे बाहर रखा गया है। वहीं, आयोग की ओर से बताया गया कि शिक्षामित्रों की संख्या करीब डेढ़ लाख है। वे नियमित पदों पर नियुक्त नहीं हैं, बल्कि मानदेय पर कार्यरत हैं।
कोर्ट को आयोग की ओर से यह भी बताया गया कि अगली नियमित टीईटी परीक्षा 26 और 27 फरवरी 2027 को कराई जाएगी। इसके बाद जून-जुलाई और दिसंबर-जनवरी में भी परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। आयोग ने वर्ष 2028 में भी परीक्षा कराने का भरोसा दिया।

