आगरा। घर में घुसकर किशोरी से दुष्कर्म व अन्य आरोपों के मामले में अदालत में करीब पांच साल सुनवाई चली। अभियोजन ने पीड़िता और उसकी मां की गवाही के आधार पर आरोप साबित करने की कोशिश की। मगर चिकित्सकीय साक्ष्य और बयानों में सामने आए अंतर की वजह से विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनिका चौधरी ने आरोपी अजय गुप्ता को बरी करने के आदेश दिए।

थाना सदर बाजार में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, किशोरी की मां ने तहरीर दी थी। आरोप लगाया कि वह परचून की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करती हैं। 7 सितंबर, 2021 को वह दोपहर में दुकान का सामान लेने गई थीं। घर में 13 वर्षीय पुत्री अकेली थी। उसी दौरान आरोपी ने पुत्री से दुष्कर्म किया। डर की वजह से पुत्री ने तुरंत घटना की जानकारी नहीं दी। बाद में बताया तो शिकायत की गई। पुलिस ने 16 सितंबर को प्राथमिकी दर्ज की।

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मेडिकल जांच में नहीं मिले चोट के निशान

अभियोजन पक्ष की तरफ से गवाह चिकित्सक डॉ. ममता किरन ने अदालत को बताया कि परीक्षण के दौरान पीड़िता के बाहरी और आंतरिक अंगों पर चोट या खरोंच के निशान नहीं मिले। पैथोलॉजी जांच में भी कोई जीवित या मृत शुक्राणु नहीं मिला। डॉक्टर ने दुष्कर्म के संबंध में निश्चित राय नहीं दी। उधर, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने घटना की तारीख, प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी और पीड़िता और उसकी मां के बयानों में विरोधाभास की दलील दी। मां ने घटना के बाद बेटी के डरे होने और बाद में जानकारी देने की बात कही जबकि पीड़िता ने घटना का विवरण अपने बयान में दिया।



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