Enticed by the golden deer, Shri Ram was drawn away; meanwhile, Ravana abducted Sita.

सोने के मृग के मोह में पड़े श्रीराम, रावण ने किया सीता हरण

पिनाहट। कस्बे में चौगान माता मंदिर के समीप रामलीला मैदान में चल रही करीब 300 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक रामलीला में बृहस्पतिवार को सीता हरण लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने विभिन्न प्रसंगों का सजीव मंचन कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।


लीला के दौरान रावण की योजना के अनुसार मामा मारीच मायावी सोने के मृग का रूप धारण कर माता सीता की कुटिया के आसपास विचरण करने लगता है। स्वर्ण मृग को देखकर माता सीता भगवान श्रीराम से उसकी छाल लाने का आग्रह करती हैं। इस पर भगवान श्रीराम मृग के पीछे वन में चले जाते हैं। मारीच श्रीराम के बाण से घायल होने पर उनकी आवाज में लक्ष्मण को पुकारता है। आवाज सुनकर माता सीता व्याकुल हो जाती हैं और लक्ष्मण को श्रीराम की सहायता के लिए भेज देती हैं।

जाने से पहले लक्ष्मण कुटिया के बाहर रेखा खींच देते हैं। इसी बीच रावण साधु का वेश धारण कर कुटिया पर पहुंचता है और भिक्षा मांगता है। माता सीता के लक्ष्मण रेखा पार करते ही रावण उनका हरण कर पुष्पक विमान से लंका की ओर चल देता है। रास्ते में गिद्धराज जटायु माता सीता को बचाने के लिए रावण से युद्ध करते हैं, लेकिन रावण तलवार से उनके पंख काटकर उन्हें जमीन पर गिरा देता है। इस मार्मिक दृश्य को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। इस दौरान रामलीला के व्यास ब्रह्मानंद पाठक, कमेटी अध्यक्ष नवीन पाराशर सहित कमेटी के अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।



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