बंगाल में भाजपा की जीत के बाद उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी किस रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी, इस पर सभी की नजर है। सपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जब मंगलवार को अमर उजाला संवाद – उत्तर प्रदेश के मंच पर थे, तो उनसे इस बारे में सीधा सवाल पूछा गया। उन्होंने कहा कि फिलहाल वे इसकी रणनीति का खुलासा नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि हमारा विरोधी बहुत ताकतवर है, इसलिए हम रणनीति नहीं बताएंगे। हालांकि, कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर वे जरूर बोले, लेकिन राहुल गांधी के साथ चुनाव प्रचार करते नजर आएंगे या नहीं, इस पर खुलकर नहीं बोले। विपक्ष का चेहरा कौन है, इस बारे में भी उन्होंने खुलासा किया। पढ़ें, उनसे बातचीत के अंश…
‘गठबंधन होगा और जीत के आधार पर होगा’
2027 में क्या कांग्रेस के साथ गठबंधन करेंगे? इस पर उन्होंने कहा कि हमने पहले कई गठबंधन किए हैं। गठबंधन करने और चलाने का अनुभव हमारे पास है। समाजवादियों ने हमेशा दूसरों को लाभ दिया है, कभी धोखा नहीं दिया। जो गठबंधन आज हमारा है, वही आगे भी चलेगा। सवाल सीट का नहीं होगा। लोकसभा चुनाव में भी सवाल सीट का नहीं, जीत का था। वही फॉर्मूला फिर से रहेगा। हमारा गठबंधन होगा और वह जीत के आधार पर होगा। सीट की संख्या के आधार पर नहीं होगा। इस बार उल्टी गंगा बहेगी क्योंकि भाजपा ने मां गंगा को धोखा दिया है।
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पिछली बार यानी 2024 में ऐसा था फॉर्मूला
यूपी में पिछला बड़ा चुनाव लोकसभा का था, जो 2024 में हुआ था। राज्य में लोकसभा की कुल 80 सीटें हैं। लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। सपा ने अपने कोटे की भदोही सीट ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के लिए छोड़ दी थी। बाकी 62 सीटों पर सपा और 17 सीटों पर कांग्रेस ने उम्मीदवार उतारे थे। नतीजों की बात करें तो सपा को 37 सीटों पर और कांग्रेस को छह सीटों पर जीत मिली थी। सपा-कांग्रेस गठबंधन ने कुल 43 सीटों जीत दर्ज करके एनडीए को 36 सीटों पर समेट दिया, जबकि एनडीए 2019 के लोकसभा चुनाव में 64 सीटें जीतने में सफल रहा था।
विपक्ष का चेहरा कौन है?
अमर उजाला के मंच से अखिलेश यादव ने इसका भी जवाब दिया। उन्होंने 10 चेहरे गिनाते हुए कहा कि विपक्ष के किसी एक चेहरे की जरूरत क्या है? महंगाई इतना बड़ा चेहरा है। नीट की परीक्षा देने वाले छात्र चेहरा हैं। पेट्रोल-डीजल, गैस का लाल सिलेंडर इस बार विपक्ष है। अग्निवीर के जवान इस बार विपक्ष हैं। विपक्ष वह मजदूर है, जिसने लाठी खाई। विपक्ष इस बार वह भी है, जो लखनऊ में 69 हजार भर्तियों को लेकर बार-बार आए हैं। विपक्ष इस बार शिक्षा मित्र भी हैं। विपक्ष इसके बाद वो लोग भी हैं, जिनके साथ अन्याय हुआ है।
‘पी यानी पीड़ित’
अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी की सोच जहां खत्म हो जाती है, वहां से पीडीए शुरू होता है। उनके लिए पी का मतलब पार्टी है। हमारे लिए पी का मतलब है पीड़ित। जहां बहस महंगाई पर होनी चाहिए, चर्चा इस बात की हो रही है कि लोग साइकिल पर चल रहे हैं। गाड़ियों का काफिला कम हो गया है। यह संकेत है कि आने वाले समय में साइकिल ही जरूरी है।
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आज मंगलवार है, भंडारा खाऊंगा
उन्होंने रैपिड फायर राउंड में भी सवालों का जवाब दिया। पसंदीदा फिल्म के बारे में उन्होंने कहा कि हमने न जाने कितनी बार मुगल-ए-आजम देखी है। विरोधी इसी से परेशान हैं कि हम मुगल-ए-आजम क्यों देखते हैं। कहां घूमने जाना पसंद करेंगे, इस पर उन्होंने कहा कि हम चूंकि विपक्ष के लोग हैं और प्रधानमंत्री जी ने मना किया है विदेश जाने के लिए, तो हम विदेश ही घूमेंगे। खाने में क्या पसंद है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि आज मंगलवार है, आज भंडारा खाऊंगा।
प्रधानमंत्री ईरान उतर गए होते तो युद्ध नहीं होता
अखिलेश यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री जिस तरह बिना परमिशन के पाकिस्तान में उतर गए थे, अगर वो ईरान में उतर गए होते, तो युद्ध नहीं होता। अगर भारत के प्रधानमंत्री ईरान के साथ खड़े हो गए होते तो युद्ध नहीं होता। यह बात आज नहीं, कल-परसों दुनिया के विशेषज्ञ जरूर मानेंगे। उन्होंने कहा कि 10 साल आपने जो सोना इकट्ठा किया, उस वजह से यह महंगा हुआ है। एक साल में सारे सुनारों की दुकानें बंद हो जाएंगी।
