अलीगढ़ पुलिस और एएमयू प्रॉक्टर ऑफिस ने आरोपी शिवा और ममता को थाने लाकर पूछताछ की, तो उन्होंने आठ साल के मासूम को परिवार का सदस्य बताया। लेकिन जब पुलिस ने मासूम से अकेले में पूछताछ की तो उसने खुद को गाजियाबाद के डासना गढ़ी मोहल्ला का रहने वाला बताया। नाम से पता चला कि वह दूसरे समुदाय का है।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे बच्चे को बिना उसके माता-पिता की जानकारी और सहमति के डासना से अलीगढ़ बहला-फुसलाकर लाए थे। आरोपी पहले डासना में ही पड़ोस में काम करता था, इसी जान-पहचान का फायदा उठाकर उसने बच्चे को अपने जाल में फंसाया। वे बच्चे को नशीला या मादक पदार्थ देते थे, ताकि वह उनके निर्देशों के मुताबिक बिना किसी डर या हिचकिचाहट के काम को अंजाम दे सके।

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प्रॉक्टर प्रो. नवेद खान ने थाना सिविल लाइंस पुलिस को तहरीर दी गई है। इसमें कहा गया है कि यह मामला केवल आम चोरी का नहीं, बल्कि अपहरण, बाल शोषण और मानव तस्करी के गंभीर दायरे में आता है।

सीओ ने बताया कि पुलिस ने किशोर के पिता को गाजियाबाद से थाने बुला लिया है। आरोपियों के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम और अन्य सुसंगत धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। बच्चे का मेडिकल परीक्षण कराकर उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करने और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश के लिए आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।



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