अमेठी। संजय गांधी अस्पताल बंद होने से प्रतिदिन आने वाले डेढ़ से दो हजार लोगों की आमद ठप हो गई है। जहां प्रतिदिन करीब 5 लाख रुपए से अधिक का नुकसान हो रहा है। ठेला लगाने वाले दुकानदार आमदनी ठप होने से परेशान हैं। मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल पर कार्रवाई होने के बाद संचालन ठप हो गया है। अस्पताल बंद होने से असर बाजार पर पड़ा है। बाजार में प्रतिदिन ठेला लगाकर जीवन यापन करने वालों की आमदनी ठप हो गई है। व्यापार मंडल अध्यक्ष संदीप द्विवेदी ने बताया कि संजय गांधी अस्पताल बंद होने से प्रतिदिन आने वाले करीब डेढ़ से 2000 लोगों की आमद ठप हो गई है। अस्पताल और चौराहे तक करीब 50 ठेला खोमचा लगाकर अपना जीवन यापन करते थे।

ज्यादातर इसमें बाहर के ही लोग थे। उन्होंने बताया कि अस्पताल गेट के सामने करीब दस से 12 चाट, समोसा, टिक्की, फास्ट फूड आदि का ठेला लगाने वाले घर को पलायन कर गए। बताया कि नाश्ता आदि दुकानों पर जहां प्रतिदिन 5000 रुपये की आमदनी होती थी, वह अब घटकर 1000 रुपये पर आ गई है। बताया कि मेडिकल स्टोर समेत अन्य सभी दुकानों की आमदनी घटना की बात कहते हुए कहा कि प्रतिदिन पांच लाख से अधिक का नुकसान हो रहा है।

मेडिकल स्टोर संचालक कृष्ण कुमार मिश्र ने बताया कि हम लोगों के साथ ही छोटे व्यापारियों पर भी असर पड़ा है। अस्पताल बंद होने से आमदनी ठप है, सिर्फ बैठे हैं। प्रतिदिन 600 से 700 के बीच ओपीडी होती थी। कई ठेला वाले तो अपनी दुकान बंद कर चले गए। बाजार के सभी व्यवसाय को मिलाकर करीब 5 लाख से अधिक का नुकसान प्रतिदिन हो रहा था।

संचालक पप्पू सिंह ने बताया कि अस्पताल बंद होने से व्यापार पर असर पड़ा है। पुराने मरीज अस्पताल खुलने के इंतजार में एक-दो दिन की दवाएं लेकर चले जाते हैं। ऐसी स्थिति में दिक्कत हो रही है।

गौरीगंज क्षेत्र निवासी राम सूरज अस्पताल गेट के सामने नाश्ते की दुकान लगाते हैं। बताया कि अस्पताल बंद होने से दुकान का किराया व लागत निकलना मुश्किल हो गया है।

सुल्तानपुर निवासी दाढ़ी मोदनवाल गेट के सामने नाश्ता पानी की दुकान करते हैं। खर्चा चलाना मुश्किल हो गया है। कैसे होगा रोजी-रोटी कैसे चलेगी अब समझ में नहीं आ रहा है। संतलाल चाय की दुकान करते हैं। बताया कि जहां सैंकड़ों की संख्या में लोग यहां आते थे अब अस्पताल बंद होने से दुकान की आमदनी ठप हो गई है।



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