आयुष्मान भारत पोर्टल पर कोड सस्पेंड होने से उपजे हालात, मुंशीगंज के संजय गांधी अस्पताल का मामला

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी बहाल नहीं हो सकीं सभी सेवाएं

संवाद न्यूज एजेंसी

अमेठी। मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल का संचालन भले ही उच्च न्यायालय के आदेश पर बहाल कर दिया गया हो, लेकिन आयुष्मान भारत के पोर्टल पर अभी भी अस्पताल का कोड निलंबित है। ऐसे में तीन माह बाद भी आयुष्मान कार्डधारी मरीजों का कार्ड से यहां इलाज शुरू नहीं हो पाया है। मरीज परेशान हैं।

18 सितंबर को संजय गांधी अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय प्रशासन ने आयुष्मान भारत के संबंध में भी शासन को पत्र भेजा था। जिसके बाद आयुष्मान भारत के पोर्टल पर अस्पताल का कोड भी सस्पेंड कर दिया गया था। बाद में उच्च न्यायालय ने अस्पताल का लाइसेंस बहाल कर दिया था। इसके बाद अस्पताल की अन्य सभी सेवाएं बहाल कर दी गईं लेकिन, आयुष्मान भारत के पोर्टल पर अस्पताल का कोड अभी तक बहाल नहीं हो सका। जिससे आयुष्मान कार्ड के जरिए मरीजों का इलाज शुरू नहीं हुआ। ऐसे में कार्ड धारक मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

इनसेट

यह हो रही परेशानी

कई मरीज अस्पताल बंद होने के पूर्व ऑपरेशन की डेट लिए थे लेकिन, आयुष्मान भारत का पोर्टल पर कोड नहीं खुलने के वह अन्य अस्पतालों का चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं आयुष्मान भारत कार्ड से अस्पताल में इलाज कराने की आस लेकर आने वाले दो दर्जन से अधिक मरीज को प्रतिदिन मायूस लौटना पड़ रहा है।

अफसरों को भेजा गया पत्र

अस्पताल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीओओ) अवधेश शर्मा ने बताया कि 18 सितंबर को अस्पताल बंद होने के पूर्व करीब दो दर्जन गंभीर मरीजों ने ऑपरेशन के लिए डेट ली थी। 05 अक्तूबर को उच्च न्यायालय की ओर से सभी सेवाओं को संचालित करने का आदेश दिया गया था। अस्पताल संचालन के बाद अब तक आयुष्मान भारत के तहत आयुष्मान कार्ड सेवा नहीं शुरू हो पाई है। इस संबंध में सीएमओ और आयुष्मान भारत से संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा गया था। बताया कि जब तक पोर्टल पर अस्पताल का कोड शुरू नहीं हो जाता तब तक आयुष्मान कार्ड पर मरीजों का इलाज संभव नहीं हो सकता।

कोड खोलने के लिए भेजा गया है पत्र

सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि आयुष्मान भारत के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पत्र भेजा गया था। केंद्र सरकार की ओर से पोर्टल के कोड खोलने की प्रक्रिया होनी है। उनके स्तर से कार्रवाई कर दी गई है। वहीं से कोड खुलने के बाद मरीज को सुविधा मिल पाएगी।



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