अमेठी। लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग के बाईपास निर्माण के लिए हुए जमीन अधिग्रहण के मुआवजे में 382 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में आरोपी दो तत्कालीन एसडीएम की अग्रिम जमानत पर बृहस्पतिवार को सुनवाई होनी है। वहीं, पुलिस ने घोटाले से जुड़े अभिलेखों की खोजबीन शुरू कर दी है। एसपी ने पूरे मामले की जांच ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) से कराने के लिए अफसरों को पत्र लिखा है।
वर्ष 2014 में एनएच-56 के चौड़ीकरण एनएचएआई (नेशनल हाईवे ऑथारिटी) की मांग पर राजस्व विभाग ने जगदीशपुर और मुसाफिरखाना में कस्बे से बाहर की भूमि अधिग्रहीत कर गलत तरीके से कृषि योग्य भूमि का मुआवजा सर्किल रेट का तीन गुना निर्धारित करने के बजाय हाईवे से सटी जमीन (इसका सर्किल रेट कई गुना अधिक) के बराबर निर्धारित कर दिया।
डीएम राकेश कुमार मिश्र ने तत्कालीन एडीएम न्यायिक राजकुमार दुबे से जांच कराई तो मुआवजा वितरण में घोटाला सामने आया। इस मामले में 11 अक्तूबर को एनएच-56 बाईपास निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए 382 करोड़ के घोटाले में शासन के आदेश पर रजिस्ट्रार कानूनगो सुरेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ने तत्कालीन एसडीएम आरडी राम व अशोक कुमार कनौजिया के अतिरिक्त अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
इस मामले में दोनों तत्कालीन एसडीएम ने सुल्तानपुर में न्यायालय में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की है। इस पर 23 नवंबर को सुनवाई होनी है।
अभिलेख को लेकर पुलिस की सक्रियता बढ़ी
अमर उजाला ने 22 नवंबर के अंक में 40 दिन बीते, पुलिस को नहीं मिली जांच रिपोर्ट शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद पुलिस इससे जुड़े रिकॉर्ड की तलाश में जुट गई है। बुधवार को भी पुलिस टीम ने तहसील पहुंचकर अभिलेखों के बारे में संबंधित से संपर्क का प्रयास किया।
एसपी डॉ. इलामारन जी का कहना है कि पुलिस दर्ज मुकदमे की विवेचना कर रही है। चूंकि प्रकरण में धनराशि काफी बड़ी है, इसलिए पूरे मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा से कराने की संस्तुति भेजी गई है।
