प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद ध्वस्तीकरण भूला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, न किसी पर जुर्माना लगा, न दोष सिद्ध हुआ

देश दीपक तिवारी, आगरा

विश्व धरोहर ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी सहित आगरा के 154 संरक्षित स्मारकों के चारों ओर अवैध निर्माण का जाल तेजी से फैल रहा है। विडंबना यह है कि पिछले दस वर्षों में इन 3,913 अवैध निर्माणों के विरुद्ध भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की कार्रवाई शून्य रही है। आरटीआई से हुए खुलासे के अनुसार, न तो किसी अतिक्रमणकारी पर पिछले 10 साल में कोई जुर्माना लगाया गया और न ही किसी का दोष सिद्ध हो सका। एएसआई केवल प्राथमिकी दर्ज कराकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर चुका है।

जन सूचना अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, ताजमहल के पूर्वी गेट से लेकर असद गली तक अवैध निर्माणों की बाढ़ आ गई है। यहां स्थानीय ताजगंज पुलिस और विकास प्राधिकरण की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। पिछले एक माह में ही 15 से अधिक अवैध निर्माणों की शिकायतें मिली हैं। इसके अतिरिक्त आगरा किले के 200 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में अवैध निर्माण नहीं रुक रहे। फतेहपुर सीकरी में चार हिस्सा से हिरन मीनार तक के प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध कब्जे हो चुके हैं। पिछले तीन महीनों में अकबर और मरियम के मकबरे के प्रतिबंधित क्षेत्रों में 100 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अतिक्रमण जस का तस है।

अतिक्रमण और अवैध निर्माण छुपा रहे अफसर

एएसआई आंकड़ों के नाम पर संस्कृति मंत्रालय और जनता को गुमराह कर रहा है। सितंबर 2023 और अप्रैल 2025, दोनों समय की आरटीआई में अवैध निर्माणों की संख्या एक समान (3913) दर्शाना यह साबित करता है कि विभाग नए अतिक्रमणों और अवैध निर्माणों को छुपा रहा है।— आकाश वशिष्ठ, विरासत संरक्षण कार्यकर्ता

15 साल से जारी नियमों की अनदेखी

सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों और प्राचीन संरक्षित स्मारक अधिनियम के बावजूद नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि वर्ष 2010-11 में प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम में संशोधन किया गया था। नए प्रावधान के तहत एएसआई को स्मारकों के संरक्षण के लिए साइट प्लान और विशिष्ट नियमावली तैयार करनी थी, जो 15 साल बीतने के बाद भी धरातल पर नहीं आ सकी।

हाईकोर्ट ने मांगा है स्पष्टीकरण

इस प्रशासनिक लापरवाही पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। एएसआई की इस उदासीनता के कारण न केवल राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का अस्तित्व खतरे में है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की विरासत संरक्षण की छवि भी धूमिल हो रही है।

प्राधिकरण के पास प्रवर्तन का अधिकार

अवैध निर्माणों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जाती हैं। प्रवर्तन दल प्राधिकरण के पास है। पुलिस और प्रशासन को संयुक्त कार्रवाई करनी है। मामलों में प्रभावी पैरवी कराई जा रही है। – स्मिथा एस कुमार, अधीक्षण पुरातत्वविद, आगरा



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