अयोध्या के पूराकलंदर के पगलाभारी में हुए विस्फोट के बाद 24 घंटे बाद भी बचाव कार्य जारी रहा। इस दौरान पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया। बगैर अनुमति किसी को भी नजदीक फटकने नहीं दिया गया। अभी भी घटना के वास्तविक राज मलबे में दबे हैं और पुलिस नमूनों की रिपोर्ट न मिलने की बात कह रही है।

पगलाभारी निवासी रामकुमार गुप्ता के मकान में बृहस्पतिवार की शाम 07:30 बजे तेज धमाका हुआ था। विस्फोट की तीव्रता इतनी थी कि कई किलोमीटर तक इसकी तेज आवाज सुनी गई। ग्रामीणों ने विस्फोट की तीव्रता से दीवारें हिलने का दावा किया। उधर, विस्फोट के बाद रामकुमार सड़क के उस पार स्थित खेत में जा गिरा। मकान की छत उड़ गई। घर के सारे सामान सौ मीटर दूर तक आसपास के खेतों में पहुंच गए।

 




Ayodhya blast Rescue operations continued for 24 hours, with the village transformed into a camp

पगलाभारी गांव में मलबे को हटाती जेसीबी
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस ने रेस्क्यू शुरू किया। मलबे के नीचे दबे चार लोगों को बाहर निकाला गया। जेसीबी से मलबा हटाने का सिलसिला शुरू हुआ, जो रात तक चलता रहा। युवती की लाश रात तक न मिलने पर सुबह फिर रेस्क्यू शुरू हुआ, जो शाम तक जारी रहा।

 


Ayodhya blast Rescue operations continued for 24 hours, with the village transformed into a camp

अयोध्या के पगलाभारी गांव में मलबे को हटाने के दौरान हुआ धमाका
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


प्रभारी मंत्री ने परिजनों को बंधाया ढांढस

पगलाभारी में हुए विस्फोट में मृतक राम सजीवन निषाद का शुक्रवार की देर शाम नंदीग्राम भरतकुंड के अंत्येष्टि स्थल पर अंतिम संस्कार किया गया। शाम को प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही मृतक के घर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया। साथ ही आर्थिक सहयोग दिलाने का आश्वासन दिया। एसडीएम ने बताया कि मृतक के परिजनों को मुख्यमंत्री किसान दुर्घटना बीमा के तहत पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद के लिए फाइल तैयार की गई है। मृतक राम सजीवन का परिवार गरीब है।


Ayodhya blast Rescue operations continued for 24 hours, with the village transformed into a camp

अयोध्या के पगलाभारी गांव में मलबे को हटाने के दौरान हुआ धमाका
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


पुलिस की लापरवाही से हुई घटना: अवधेश प्रसाद

पगलाभारी में हुए विस्फोट के बाद सांसद अवधेश प्रसाद शुक्रवार की दोपहर घटनास्थल पहुंचे और मामले की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि पहले भी रामकुमार पटाखों का कारोबार करते थे। गत वर्ष घटना होने पर गांव के दबाव से वह गांव के बाहर मकान बनाकर रहने लगे। बाहर आने पर वह बड़े पैमाने पर वही धंधा करने लगे।


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पगलाभारी गांव में साली के शव को एंबुलेंस में लेकर जाते स्वास्थ्य कर्मी
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


थाने पर आठ नंबर रजिस्टर होता है, जिसमें इसका नाम भी दर्ज रहा होगा तो पुलिस को इसकी गतिविधियों की निगरानी करनी थी। थाने से तीन किलोमीटर दूरी पर बड़े पैमाने पर इस तरह काम हो रहा था, जो पुलिस की कार्यशैली को संदिग्ध बताता है। पुलिस की लापरवाही से ही इस तरह की घटना हुई है। पुलिस ने इस पर सख्ती की होती तो छह लोगों की जान न जाती। 

 




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