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500 वर्षों के संघर्ष व कई पीढ़ियों की तपस्या के बाद आए इन स्वर्णिम पलों के साक्षी बनने को देश के कोने-कोने से लोग उमड़ पड़े। अधिक भीड़ से सुरक्षा व्यवस्था चुनौतीपूर्ण होने लगी तो जवानों ने उन्हें हटाने का प्रयास किया लेकिन भक्तों की आस्था के आगे जवानों का रौब नतमस्तक हो गया। सरयू तट से लेकर कई प्रमुख मार्गों पर डटे हजारों श्रद्धालु रामनाम जपते हुए स्वयं को धन्य महसूस करते रहे।

प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का सोमवार को शुभारंभ हुआ। इस दौरान प्रधानमंत्री समेत कई विधाओं की नामचीन हस्तियां अयोध्या पहुंची। पहली बार इतनी संख्या में जुटे अति विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं थी। इसलिए देश की सभी प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों ने कई दिन से कमान संभाल रखा था।

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आयोजन में सिर्फ आमंत्रित अतिथियों को ही जाने का अवसर मिला लेकिन लोगों की अपने आराध्य के प्रति आस्था व प्रेम उन्हें देश के कोने-कोने से खींच लाई थी। वह सभी इस ऐतिहासिक बेला में प्रभु श्रीराम के मंदिर में न सही, मंदिर के इर्द-गिर्द ही रहकर स्वयं को कृतार्थ करने की लालसा लिए सप्ताह भर पूर्व से यहां पहुंच चुके थे।

उन्हें सुरक्षा बलों ने रविवार की देर रात बाहर निकलने को कहा तो वह सभी सरयू तट से लेकर नया घाट व अन्य स्थलों पर जमा हो गए। सुबह पैदल चलकर सरयू स्नान किया। उसके बाद लता चौक पर पहुंचकर प्राण प्रतिष्ठा की झांकियां देखने लगे। यहां भी बार-बार सुरक्षाकर्मी उन्हें हटाने का प्रयास करते रहे, लेकिन जवानों के प्रति आदरभाव रखकर वह चुपचाप पीछे हो गए और दूर से ही अयोध्या की अलौकिकता को निहारते रहे।

झारखंड से आए अनूप लाल यादव, गणेश शंकर ने बताया कि जवान अपना काम कर रहे हैं, हमें अपना काम करना है। बिना रामलला के दर्शन किए कैसे लौट जाएं। सरयूतट पर मौजूद बिहार के गोपीनाथ, कृपादयाल, रामनेवल ने बताया कि 18 जनवरी को किसी तरह यहां पहुंचे थे। कष्ट भले ही सहना पड़ा, लेकिन इस शुभ घड़ी में अयोध्या पहुंचकर ही हम धन्य हो गए।



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