छोटे बच्चों में रात के समय लगातार रोने और पेट की समस्याओं को लेकर अभिभावक अक्सर परेशान रहते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके. मिश्रा के अनुसार, नवजात और शिशुओं में इस परेशानी का मुख्य कारण गैस्ट्रोकोलिक रिफ्लेक्स होता है। हालांकि यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है, लेकिन अनजाने में माता-पिता की कुछ गलतियां इस समस्या को बढ़ा देती हैं।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि शिशु का पेट छोटा होता है। जब भी बच्चा रोता है, तो मां या परिजन समझ लेते हैं कि उसे भूख लगी है और मिनट-मिनट पर दूध पिलाने लगते हैं। बार-बार दूध पिलाने से पेट में गैस, भारीपन और दर्द होता है, जिससे बच्चा रात में चिड़चिड़ा होकर रोने लगता है। रोने की वजह हर बार भूख नहीं, बल्कि पेट दर्द या असहजता भी हो सकती है।
डाॅक्टर ने बताया कि शून्य से 6 महीने तक बच्चे के शारीरिक विकास के लिए केवल मां का दूध ही सर्वोत्तम है। इस दौरान बच्चे को घुट्टी, शहद या ऊपरी आहार बिल्कुल न दें। साथ ही, एक बार दूध पिलाने के बाद कम से कम 2 घंटे का अंतर रखें। तुरंत दूध पिलाने से पाचन तंत्र पर दबाव पड़ता है। दूध पिलाने के बाद बच्चे को सीधे लेटाना भी नुकसानदेह होता है। इसलिए दूध पिलाने के बाद लगभग 30 मिनट तक बच्चे को कंधे से लगाकर रखें। उसकी पीठ सहलाए और डकार अवश्य दिलवाए।
निश्चित समय अंतराल: हर बार रोने पर दूध न पिलाएं। दो फीडिंग के बीच कम से कम 2 घंटे का अंतर जरूर रखें।
थपकी और डकार जरूरी: दूध पिलाने के बाद लगभग 30 मिनट तक बच्चे को कंधे से लगाकर रखें और डकार अवश्य दिलवाएं।
दूध पिलाने की सही पोजीशन: बच्चे का सिर थोड़ा ऊंचा उठाकर ही दूध पिलाएं, ताकि पेट में हवा न जाए।
