संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

Updated Sat, 24 May 2025 12:17 AM IST

Bodies were lying in the bank, blood was scattered, Mayawati government was shaken


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मैनपुरी। 28 जनवरी 2003 को जब यह घटना हुई थी, उस वक्त प्रदेश में मायावती की सरकार थी। इस घटना ने प्रदेश सरकार को हिलाकर रख दिया था। सरेराह बैंक में डकैती की वारदात की खबर को सुनकर मायावती ने खुद आगरा पुलिस रेंज के अधिकारियों को आदेश दिया था कि इस घटना का खुलासा जल्द करें। अधिकारियों ने मैनपुरी में डेरा डाल लिया था। घटना कितनी जघन्य थी, इसको मुकदमा वादी एवं स्टेट बैंक शाखा में तैनात रहे सुरक्षाकर्मी गिरीश चंद्र दुबे ने कोर्ट में बयान बताया था। उन्होंने बयान दिया था कि वह आर्मी से सेवानिवृत्त हैं। घटना वाले दिन उनकी ड्यूटी रात में 9.30 बजे से 1.30 बजे तक थी। रात्रि की ड्यूटी करने के लिए समय करीब शाम 8 बजे बैंक पहुंचा तो देखा कि मुख्य गेट का चैनल कुछ खुला था। अंदर घुसा तो स्ट्रांग रूम के दरवाजे के पास लगा बल्ब जल रहा था। चैनल गेट के पास गेट के दाहिनी तरफ सुरक्षा गार्ड शिवराज सिंह यादव निवासी गोविंदेपुर, भोगांव का शव खून से लथपथ हालत में पड़ा था। घबराकर भीतर घुसा तो देखा गार्ड की एक नाली बंदूक स्ट्रांग रूम के पास रखी थी। उसके बाद बैंक के अंदर ही ऊपरी मंजिल पर बने कमरों में रहने वाले खजांची आरके गुप्ता व एकाउंटेंट एमसी अग्रवाल को आवाज लगाई। इसके बाद बैंक की छत के ऊपर जाकर देखा कि कमरे में बिस्तर व दीवार पर खून के छीटे पड़े थे। फर्श पर भी खून पड़ा था। कमरे से लगे स्टोर रूम का दरवाजा खोलकर देखा तो स्टोर रूम के अंदर आरके गुप्ता और एमसी अग्रवाल के खून से लथपथ शव पड़े थे।

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