अमर उजाला ब्यूरो

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झांसी। मूल बजट में भी सरकार ने किसानों के लिए अंतरिम बजट के प्रावधान ही जस के तस रखे हैं। अंतरिम बजट में सरकार ने तिलहन एवं दलहन फसलों के लिए देश को आत्मनिर्भर बनाने को ऑयल सीड्स अभियान आरंभ करने का एलान किया था। आम बजट में सरकार ने फिर से दलहन एवं तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने की बात कही है। इससे बुंदेलखंड (झांसी, ललितपुर एवं जालौन) के करीब 3.09 लाख किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

बुंदेलखंड की मिट्टी मूंगफली, तिल, उड़द एवं मूंग के लिए सबसे मुफीद मानी जाती है। खरीफ सीजन में झांसी समेत ललितपुर एवं जालौन में सर्वाधिक इनका उत्पादन होता है। यह पूरा खास तौर से उड़द, मूंगफली, मूंग एवं तिल के लिए दूर-दराज के इलाकों में भी जाना जाता है। यहां के तिल एवं मूंगफली की मांग दक्षिण भारत के राज्यों तक है। अब सरकार ने बजट में इसके उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों की मदद करने का वादा किया है। इससे किसानों में उम्मीद जगी है। सरकार ने तिलहन एवं दलहन उत्पादन को बढ़ाने को उत्पादन समेत भंडारण और विपणन व्यवस्था पुख्ता करने की बात कही है। इससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ेगा बल्कि विपणन व्यवस्था मजबूत होने से किसानों को फसल की अच्छी कीमत भी मिल सकेगी। बुंदेलखंड में खरीफ सीजन में 2.09 किसान मूंगफली एवं तिल का उत्पादन करते हैं वहीं, करीब एक लाख किसान दलहन उत्पादन करते हैं। झांसी में 1.20 लाख किसान, ललितपुर 1.05 जबकि करीब 84 हजार किसान दलहन एवं तिलहन उत्पादन करते हैं। उपनिदेशक कृषि महेंद्र पाल सिंह का कहना है कि सरकार के फैसले से यहां उत्पादन को बढ़ावा मिल सकेगा।

इनसेट

तिलहन का रकबा

तिलहन रकबा (हेक्टेयर में)

मूंगफली 27710

सोयाबीन 3122

तिल 1,14,502

कुल तिलहन- 1,45,334

दलहन का रकबा (हेक्टेयर में)

उड़द – 72704

मूंग 8617

अरहद 432

कुल रकबा- 81753

एक नजर में कृषि के आंकड़े

कृषि योग्य भूमि – 362.099 हेक्टेयर

खरीफ का क्षे.- 272.171 हे.

रबी- 349.911 हे.

जायद 3.315 हे.

मिट्टी (हेक्टेयर में)

पड़वा- 161.643

मार- 77.77

कावर- 46.890

नहरों की लंबाई- 1236 किमी

राजकीय नलकूप 180

पक्के कुएं- 30231



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