
सांसद सतीश गौतम से मिलते निजी कोचिंग संस्थानों के संचालक
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शिक्षा मंत्रालय के द्वारा कोचिंग संस्थानों में 16 वर्ष से कम उम्र या 12वीं कक्षा से पहले के विद्यार्थियों को दाखिला न देने के आदेश से परेशान निजी शिक्षक और निजी कोचिंग संस्थानों के संचालकों ने भाजपा सांसद सतीश गौतम से भेंट कर अपनी दिक्कतें बताईं।
सांसद को कोचिंग संचालकों ने बताया कि शिक्षा मंत्रालय से जारी दिशा निर्देश के लगभग सभी बिंदुओं में उन्हें किसी प्रकार की कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन 16 वर्ष की आयु से कम विद्यार्थियों के कोचिंग में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाना समझ से परे है। संचालकों ने कहा कि 16 वर्ष की आयु तक के विद्यार्थियों को सर्वाधिक देखरेख और पढ़ाई में सहयोग की आवश्यकता होती है। मनोविज्ञान के आधार पर यही सीखने की सबसे ज्यादा उचित उम्र होती है, जिससे कि भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विद्यार्थी अपने आप को पहले से ही तैयार रख सकें।
अधिकांश अभिभावक भी बच्चों को पढ़ाई से संबंधित दिशा-निर्देश देने में असमर्थ हैं। इस पर उन्हें विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की जरूरत होती है, जो कोचिंग संस्थानों के माध्यम से मिलते हैं। कोचिंग संस्थानों में अभिभावक अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए ही लेकर आते हैं। कोचिंग संस्थानों से जुड़ना बच्चों की इच्छा होती है किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं होता है। उन छात्रों का क्या होगा, जिन्हें एएमयू, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, सैनिक स्कूल, जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षाओं को पास करने के लिए अतिरिक्त मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। एक तरफ सरकार कौशल विकास और आत्मनिर्भर को बढ़ावा देने की विभिन्न योजनाएं बनाती है।
दूसरी तरफ शिक्षित व योग्य लाखों लोग जो कोचिंग के माध्यम से जीवन यापन कर रहे हैं, वे बेरोजगार हो जाएंगे। इस मौके पर देव क्लासेज के निदेशक धर्मेंद्र माल्यान, ड्यूटी सोसाइटी के निदेशक मजहर सिद्दीकी, अवंति क्लासेस के निदेशक मनीष यादव, जैद अली, दृष्टि कोचिंग के निदेशक नरेश राजपूत, सिनर्जी कोचिंग के निदेशक एमन बिलग्रामी, पुरुषोत्तम, जेएमडी अकादमी के एसके शर्मा, डीके सिंह, ब्रिक्स कोचिंग के सादिक हसन, कैटालिस्ट कोचिंग से विकास, विनीत कोचिंग के निदेशक विनीत शर्मा आदि मौजूद रहे।
शिक्षा मंत्री से करेंगे वार्ता : सांसद
सांसद सतीश गौतम ने निजी शिक्षक और निजी कोचिंग संस्थानों के संचालकों को आश्वासन दिया कि वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री से वार्ता करेंगे और उन्हें सुझाव पत्र देंगे। उनसे अनुरोध करेंगे कि वह कोचिंग में 16 वर्ष की आयु वाले विद्यार्थियों की पाबंदी निर्णय पर विचार करें। अभिभावकों व शिक्षकों के साथ विद्यार्थियों की भी आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाए।
