
डीएपी की कालाबाजारी (फाइल)
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ताजनगरी आगरा के किरावली में नमक और रिफाइंड के बिलों पर पकड़ी गई डीएपी मुजफ्फरनगर की ट्रांसपोर्ट कंपनी से भेजी गई थी। इस मामले में ट्रांसपोर्टर की मिलीभगत भी हो सकती है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने के बाद कृषि विभाग से जीएसटी के लिए भरे गए इनवॉइस सहित अन्य कागजात मांगे हैं। पुलिस का कहना है कि डीएपी खाद की कालाबाजारी में ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक से भी पूछताछ की जाएगी।
किरावली मंडी के पास एसडीएम ने शुक्रवार की रात छापा मारकर ट्राला से 500 बोरी डीएपी बरामद की थी। ट्रॉला चालक अनूप गुर्जर ने पूछताछ में बताया कि मुजफ्फरनगर की बालाजी ट्रांसपोर्ट कंपनी ने नमक और रिफाइंड के इनवॉइस बिल उसे दिए थे। मालिक सचिन है। माल का लदान मुराद नगर, गाजियाबाद से किया गया।
पुलिस का मानना है कि जहां से बिल जेनरेट किए गए, उन्हें जानकारी रही होगी कि डीएपी (खाद) का लदान किया जाना है। पर, बिल में गलत माल जानबूझकर दर्शाया गया ताकि चेकिंग में डीएपी नहीं पकड़ी जा सके। ट्रक चालक को माल किरावली मंडी पर उतारने के लिए कहा गया था। ऐसे में खाद को दूसरे ट्रक में लोड कराने वाले संजय और आशु की तलाश पुलिस कर रही है।
मुकदमे में ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक सचिन को भी नामजद किया गया है। दोनों एसडीएम का छापा पड़ने के बाद ट्रक लेकर भाग निकले थे। पकड़ी गई खाद के नमूने भी जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं। डीसीपी सोनम कुमार का कहना है कि पुलिस प्रशासन की टीम ने डीएपी की बोरियां पकड़ी थीं। इस मामले में जांच की जा रही है। बिल फर्जी हैं या असली यह जांच के बाद पता चलेगा।
