
पितरों के लिए किया दान
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सतुआ संक्रांति का उत्सव शनिवार को धूमधाम से मनाया गया। गंगा तट पर श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद पितरों की मुक्ति की प्रार्थना के साथ तर्पण भी किया। इसके अलावा जरूरतमंदों में सत्तू, घट, पंखा का दान भी किया गया।
गंगा के तट पर सुबह से स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। मेष संक्रांति पर सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही मांगलिक कार्यों पर लगा विराम भी हट गया। मणिकर्णिकाघाट स्थित सिद्धपीठ सतुआ बाबा आश्रम में परंपरा के अनुसार प्रसाद में सत्तू वितरण किया गया।
पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर संतोषदास महाराज ने सुबह यमुनाचार्य महाराज की छवि का विधि विधान से पूजन किया। इसके बाद उन्होंने शिष्यों व श्रद्धालुओं की झोली में सत्तू प्रसाद दिया। उन्होंने कहा कि सत्तू संक्रांति के दिन ही प्रथम सतुआबाबा को श्रीमहंत रणछोड़दास महाराज को बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ ने सतुआदान का आदेश दिया था। इसके बाद से ही सतुआबाबा पीठ इस परंपरा का निर्वाह कर रही है।
गुरु के आदेशानुसार सत्तू वितरण की परंपरा अनवरत चली आ रही है। वहीं गंगा के तटों पर सुबह से दोपहर तक स्नान-दान करने वाले श्रद्धालुओं की काफी भीड़ थी। लोगों ने पुण्य लाभ के लिए धार्मिक कृत्य किए।
