सावन की मासिक दुर्गाष्टमी पर शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व है। यह बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी। पूजा के लिए सुबह 8:19 बजे से सुबह 10:35 बजे तक का समय अति शुभ रहेगा।
ज्योतिषाचार्य डाॅ.पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि सुबह स्नान के पश्चात मां दुर्गा की प्रतिमा को गंगाजल अर्पित कर शुद्ध करें। लाल-पीले पुष्प, माला, अक्षत, रोली, सिंदूर और लाल चुनरी चढ़ाएं। इसके साथ ही सुहाग का संपूर्ण शृंगार सामान अर्पित करें। श्री दुर्गा चालीसा एवं श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
तत्पश्चात मां को हलवा-पूरी और काले चने का भोग लगाएं। धूप-दीप प्रज्ज्वलित कर महाआरती करें। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार, दुर्गाष्टमी पर मां दुर्गा की साधना करने से साधक को उत्तम स्वास्थ्य, योग्य और मनचाहा वर, अखंड सुख-समृद्धि व जीवन के हर क्षेत्र में विजय की प्राप्ति होती है।
काजल बंसल ने बताया कि दुर्गाष्टमी पर सुबह शुभ मुहूर्त में ही गंगाजल से मां का अभिषेक कर पूजन करूंगी। दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से मन को अद्भुत शांति मिलती है और घर के सारे क्लेश दूर हो जाते हैं।
ममता गोयल का कहना है कि हर अष्टमी पर हलवा-पूरी और चने का भोग बनाकर माता रानी को अर्पित करती हूं। मां दुर्गा की कृपा से परिवार में हमेशा आरोग्य और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
पूनम अग्रवाल ने कहा कि परिवार की सुख- शांति के लिए पूरे सावन व्रत रखती हूं। मासिक दुर्गाष्टमी का उपवास भी पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ रखेंगी।
