भूमि की पैमाइश कराने के लिए एक हजार रुपये प्रति गाटा फीस निर्धारित है। इसके बाद भी लेखपाल व कानूनगो किसानों से पैमाइश व मेड़ बंदी के लिए मनमानी रिश्वत वसूलते हैं। यदि यह रिश्वत न दी जाए तो गलत रिपोर्ट लगाकर भी एसडीएम कोर्ट भेज देते हैं। किसान इस परेशानी से बचने के लिए रिश्वत देना ही उचित समझता है।
किसी किसान को यदि अपने खेत या अन्य भूमि की पैमाइश करानी है तो वह सबसे पहले राजस्व परिषद के पोर्टल पर आवेदन करेगा। इसके बाद एक हजार रुपये प्रति गाटा के हिसाब से ऑन लाइन फीस जमा करनी पड़ती है। इसके बाद स्व प्रमाणित प्रति राजस्व निरीक्षक को देनी होगी। राजस्व निरीक्षक नोटिस जारी कर संबंधित सहखातेदारों को नोटिस जारी कर पैमाइश की तिथि निर्धारित कर अवगत कराया जाएगा। इसके बाद राजस्व निरीक्षक मौके पर जाकर सभी पक्षों को सुनेगा। सहमति बनने पर पैमाइश करेगा। यदि सभी पक्ष राजी नहीं होते हैं तो धारा 24 के तहत राजस्व निरीक्षक अपनी आख्या एसडीएम कोर्ट में प्रस्तुत करेगा। एसडीएम के सुनवाई के बाद आदेश जारी होगा। इस आदेश पर राजस्व निरीक्षक भूमि की पैमाइश कर पत्थरगढ़ी कराएगा।
