बिंदकी। श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को कथावाचक अरविंद मिश्रा ने राजा परीक्षित के जन्म की कथा सुनाई। मलवां ब्लाक के महरहा गांव में सात दिवसीय भागवत कथा के दूसरे दिन परीक्षित जन्म, सुखदेव आगमन की कथा सुनाई।
कहा कि युद्ध में गुरु द्रोण के मारे जाने से क्रोधित होकर उनके पुत्र अश्वत्थामा ने क्रोधित होकर पांडवों को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया। ब्रह्मास्त्र लगने से अभिमन्यु की गर्भवती पत्नी उत्तरा के गर्भ से परीक्षित का जन्म हुआ। परीक्षित जब बड़े हुए नाती पोतों से भरा पूरा परिवार था। सुख-वैभव से समृद्ध राज्य था।
जब वह 60 वर्ष के थे, तब एक दिन वह क्रमिक मुनि से मिलने उनके आश्रम गए। उन्होंने आवाज लगाई, लेकिन तप में लीन होने के कारण मुनि ने कोई उत्तर नहीं दिया। राजा परीक्षित स्वयं का अपमान मानकर निकट मृत पड़े सर्प को क्रमिक मुनि के गले में डाल कर चले गए।
अपने पिता के गले में मृत सर्प को देख मुनि के पुत्र ने श्राप दे दिया कि जिस किसी ने भी मेरे पिता के गले में मृत सर्प डाला है। उसकी मृत्यु सात दिनों के अंदर सर्प के डसने से हो जाएगी। श्राप ज्ञात होने पर राजा परीक्षित ने विद्वानों को अपने दरबार बुलाया और उनसे राय मांगी।
विद्वानों ने उन्हें सुखदेव का नाम सुझाया और इस प्रकार सुखदेव का आगमन हुआ। कथा के दौरान मुख्य यजमान राहुल अवस्थी, राधा अवस्थी, आनंद प्रकाश, मानस, अमित, रजत शुक्ला, सुरेश अवस्थी, जयप्रकाश, मनोज, आकाश अनुपम सहित तमाम लोग शामिल रहे।
