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अतरौली में मत्स्य आहार मिल स्थापित है, जहां मछलियों के खाने के लिए दाना तैयार किया जाता है। यहां प्रतिदिन 12 क्विंटल तक दाना बनता है। इसी तरह टप्पल के गांव भोजाका और गोंडा रोड स्थित शहरी मदनगढ़ी में हैचरी स्थापित हैं, जहां मछलियों का बीज तैयार किया जाता है।
रसलगंज मछली बाजार में बिगहेड मछली – फोटो : संवाद
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सर्दी का मौसम शुरू होते ही अलीगढ़ जिले में मछली की बिक्री बढ़ गई है। इस साल करीब 150 करोड़ के कारोबार की उम्मीद है। मार्केट में दस किस्म की मछलियां हैं, जिनमें मिठास के कारण रोहू और कम कांटे के कारण पंगेशियस मछली की डिमांड ज्यादा है। शोल और सिंघी महंगी मछलियां हैं, जिनकी डिमांड खास वर्ग में है। इसकी कीमत 500 रुपये से 800 रुपये प्रतिकिलो तक है।
मछली पालकों ने मछली का आहार बनाने और बीज उत्पादन के केंद्र भी स्थापित किए हैं। अतरौली में मत्स्य आहार मिल स्थापित है, जहां मछलियों के खाने के लिए दाना तैयार किया जाता है। यहां प्रतिदिन 12 क्विंटल तक दाना बनता है। इसी तरह टप्पल के गांव भोजाका और गोंडा रोड स्थित शहरी मदनगढ़ी में हैचरी स्थापित हैं, जहां मछलियों का बीज तैयार किया जाता है।
मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विभिन्न योजनाएं तैयार की हैं। जिनका लाभ मछली पालक ले रहे हैं। इसके अलावा प्रतिबंधित मछलियों को बाजार में आने से रोकने के लिए लगातार निरीक्षण किया जाता है। काफी समय से इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है।– प्रियंका आर्य, सहायक निदेशक मत्स्य