– कई बार हो चुके हादसे, सात रेंजों में सिर्फ चार में ही है पुरानी राइफलें
संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। पेड़ काटने से जंगल का दायरा सिमटता जा रहा है। जंगल की हिफाजत के लिए वनकर्मियों की तैनाती तो की गई है। लेकिन हथियारों की जगह उन्हें लाठी-डंडे थमाए गए हैं। वन माफिया से आमना-सामना होने पर कई वनकर्मी गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। ऐसे में अब मुठभेड़ होने पर वनकर्मी कदम पीछे खींचने पर मजबूर हो जाते हैं। वन विभाग की सात रेंजों में से सिर्फ चार में ही पुरानी राइफलें हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने पत्र लिखकर हथियारों की मांग की है।
झांसी का भौगोलिक क्षेत्र 502400 वर्ग किलोमीटर है। जिसमें 5024 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है। वन क्षेत्र में सागौन, शीशम, खैर, आम, पीपल, महुआ सहित कई प्रजातियों के बेशकीमती पेड़ लगे हुए हैं। जंगलों की निगरानी के लिए जिले झांसी, बबीना, चिरगांव, मोंठ, मऊरानीपुर, गुरसराय, बामौर में रेंज स्थापित की गई हैं। इसके साथ ही कई जगहों पर चौकियां बनाकर वनकर्मियों की तैनाती की गई है।
लेकिन रक्षा के नाम पर वनकर्मियों को हथियारों की जगह लाठी और डंडे थमा दिए गए हैं। ऐसे में वन तस्करों से आमना-सामना होने पर वनकर्मियों को पीछे हटना पड़ता है। जबकि विभागीय नियमों के मुताबिक प्रत्येक रेंज में कम से कम पांच आधुनिक हथियार होना आवश्यक है। प्रभागीय वन अधिकारी जेबी शेंडे ने बताया कि वनकमियों के लिए आधुनिक हथियारों के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए विभागीय अफसरों को पत्र लिखा गया है।
कई बार हो चुके हैं जानलेवा हमले
– वर्ष 2008 में गुरसराय के भस्नेह में पेड़ काटने से रोकने पर वनकर्मी शिवनाथ पर गोली चला दी गई थी। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
– एक जून 2024 को मोंठ वन रेंज के ढिमरपुरा में अतिक्रमण हटाने गई वन विभाग की टीम को चारों ओर से घेर लिया गया था। आधुनिक हथियार नहीं होने पर वनकर्मी असहाय नजर आ रहे थे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह वनकर्मियों की जान बचाई थी।
– वर्ष 2021 में वन क्षेत्र से अवैध रूप से बालू का खनन रोकने पर वन दरोगा भागीरथ को बंधक बनाकर पीटा गया था।
– वर्ष 2022 में झांसी वन रेंज के ग्राम बाजना में वाचर भागीरथ पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया था।
– 26 जून 2024 को झांसी रेंज के ग्राम सैंयर में पेड़ काटने से रोकने पर वन रक्षक मनीषा पर हमला कर दिया था। उसने भाग कर जान बचाई थी।
