
सीएम योगी के ड्रिम प्रोजेक्ट गोरखपुर जू में वॉटर ट्रीटमेंट मशीन खराब है।
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सीएम योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट गोरखपुर चिड़ियाघर में इस तपिश भरी गर्मी में इंसान ही नहीं, जानवर भी शुद्ध पानी के लिए तरस रहे हैं। 50 लाख खर्च करके तीन साल पहले यहां लगाया गया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट सूखा है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत तीन-चार आरओ लगाए गए थे, वे भी खराब हैं। चिड़ियाघर में ही तीन कैंटीन हैं। जहां से रोजाना करीब एक हजार पानी की बोतलें बिक जाती हैं, वह भी प्रिंट रेट से ज्यादा कीमत पर। एक तरफ मुफ्त में पानी की व्यवस्था को शुरू कराने में अड़चनें और दूसरी तरफ पानी बेचकर मालामाल होने के शातिरपन से सहज अंदाजा लगाएं तो पानी का यह खेल फौरन समझ में आ जाएगा।
चिड़ियाघर में आने वाले दर्शकों के साथ ही वन्य जीवों को पानी पिलाने, नहलाने, पौधों की सिंचाई, मछली पालन के लिए चिड़ियाघर परिसर में 13 जून 2020 को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर तैयार कर दिया गया। इसे दिल्ली की एक्वा प्राइवेट लिटिमेंट ने 50 लाख रुपये में स्थापित किया। 27 मार्च 2021 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका उद्घाटन किया था।
जानकारों की माने तो अधिकारियों ने कंपनी के पांच लाख रूपये भुगतान ही नहीं किया। जिसके चलते कंपनी ने भी प्लांट को हैंडओवर नहीं किया। वहीं, प्लांट को चलाने के लिए बिजली का कनेक्शन भी नहीं लिया गया। जबकि, वन मंत्री से लेकर वाइल्ड लाइफ उत्तर प्रदेश शासन की टीम ने प्लांट को शुरू कराने का निर्देश दिया था। लेकिन, जिम्मेदार अधिकारियों ने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को शुरू कराना जरूरी नहीं समझा।
