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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने दलित युवक अमन कुमार गौतम की मौत के मामले में राज्य सरकार से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ल की खंडपीठ ने अमन की पत्नी और बहन की याचिका पर यह निर्णय दिया।
पत्नी रोशनी व बहन का कहना है कि 13 अक्तूबर को विकासनगर के अंबेडकर पार्क में जुआ खेलने की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर गई। पार्क के पास खड़े अमन गौतम को पुलिस ने पकड़ लिया। आरोप है कि पुलिस ने उसे मारा-पीटा। इससे उसकी तबीयत खराब हो गई। इलाज के लिए अमन को लोहिया अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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उन्होंने कहा कि अमन के शरीर पर चोटों के निशान थे। पुलिस ने घटना की एफआईआर भी दो दिन बाद दर्ज की थी। इसका वीडियो बनाया गया था। इसके बावजूद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के पहले शरीर पर चोटों के निशान का जिक्र नहीं किया गया। उन्होंने मामले की जांच किसी अन्य एजेंसी से कराने की भी गुजारिश की है।
उधर, सरकारी वकील ने मामले में जवाब दाखिल करने को समय देने का आग्रह किया। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को पहले हुए पोस्टमार्टम की वीडियो रिकार्डिंग के साथ जवाबी हलफनामा पेश करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। इसके बाद याचिका को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।
