Irregularities in school vans and buses in Lucknow, children are being taken arbitrarily

स्कूल वैन से जाते बच्चे।
– फोटो : अमर उजाला

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 शहीद पथ पर शुक्रवार को स्कूली वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने व बच्चों के अस्पताल पहुंचने के लिए पुलिस, आरटीओ, स्कूल प्रशासन, अभिभावक… सब जिम्मेदार हैं। इनकी लापरवाही का ही नतीजा है कि राजधानी में प्राइवेट वाहनों से लेकर ई रिक्शा तक में स्कूली बच्चों को ढोया जा रहा है। उधर, जिम्मेदार आंखें मूंदे हैं।

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परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के निर्देश पर बीते महीने स्कूली वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया गया। इसके खत्म होते ही प्राइवेट कार, ऑटो, ई रिक्शा फिर से सड़कों पर आ आए। शहीद पथ पर बच्चों को स्कूल लेकर जाते वक्त पलटी वैन प्राइवेट कार की श्रेणी में पंजीकृत थी, जिसका व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा था। आरटीओ प्रवर्तन को ऐसे वाहनों पर नकेल कसनी चाहिए थी। वहीं, अभिभावक भी बगैर जांच-पड़ताल के प्राइवेट वाहनों, ई रिक्शा जैसे असुरक्षित वाहनों से बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। परिवहन विभाग के अफसरों का आरोप है कि ऐसे वाहनों की चेकिंग के दौरान पुलिस सहयोग नहीं करती।

उधर, स्कूलवाले हादसा होते ही पल्ला झाड़ लेता है, जबकि उन्हें भी देखना चाहिए कि बच्चे स्कूल कैसे आ-जा रहे हैं। परिवहन विभाग की ओर से स्कूली वाहनों पर कार्रवाई के बाद जो संस्तुति की जाती है, उसे लेकर डीआईओएस स्तर पर भी लापरवाही बरती जाती है।

पांच हजार प्राइवेट वाहन बच्चों को ढो रहे

स्कूली वाहन के रूप में राजधानी के शहरी इलाके में तीन हजार व ग्रामीण क्षेत्रों में दो हजार से ज्यादा प्राइवेट वाहन चल रहे हैं। इनमें वैन व ईको की संख्या सबसे ज्यादा है। इन स्कूली वाहनों में सुरक्षा के इंतजाम मुकम्मल नहीं हैं। न ही सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इन वाहनों पर ड्राइवर, स्कूल आदि के नाम व नंबर तक नहीं लिखे हैं। फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं हैं।

रद्द होगा प्राइवेट वाहन का पंजीकरण

आरटीओ (प्रवर्तन) संदीप कुमार पंकज ने बताया कि बच्चों को ला रहे प्राइवेट वाहन का पंजीकरण रद्द किया जाएगा। बताया कि मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब की पहल पर स्कूली बच्चों के सुरक्षित परिवहन के लिए ‘मिशन भरोसा’  एप से चालकों, वाहन स्वामी व अभिभावकों को जोड़ने का काम किया जा रहा है।



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