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पर्वत सिंह बादल (ब्यूरो चीफ जालौन)✍️

(उरई जालौन) उरई: आज बुजुर्गों को अपनों का साथ और बच्चों को बाबा-दादी का प्यार मिले, इसके लिए जिलाधिकारी समीर ने एक संवेदनशील एवं अनूठी पहल की है। उनकी मंशा है कि वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों और बच्चों के बीच ऐसा आत्मीय रिश्ता विकसित हो, जिसमें बच्चे अपने चुने हुए दादा-दादी को पढ़ाएं भी और उनसे पढ़ें भी। साथ बैठकर पढ़ने, खेलने और बातचीत करने के माध्यम से जहां बुजुर्गों को बच्चों में अपने पोते-पोतियों जैसा अपनापन मिलेगा, वहीं बच्चों को भी बुजुर्गों के अनुभवों, संस्कारों और जीवन की सीख को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए जिलाधिकारी समीर के निर्देश पर हमारी उम्मीद मिशन के बच्चों ने वृद्धाश्रम में लीफ आर्ट यानी पत्तियों से कलाकृतियां बनाने की गतिविधि में भाग लिया। बच्चों ने अपनी पसंद से बुजुर्गों को दादा-दादी के रूप में चुना और उनके साथ बैठकर सुंदर कलाकृतियां बनाईं। इस दौरान बच्चों और बुजुर्गों के बीच स्नेह तथा अपनत्व का भाव दिखाई दिया। यह गतिविधि बुजुर्गों और बच्चों के बीच संवाद एवं भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक कदम रही। जिलाधिकारी समीर का विशेष जोर इस बात पर है कि वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्ग केवल देखभाल तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें बच्चों के साथ समय बिताने, अपनी जानकारी साझा करने और परिवार जैसा माहौल महसूस करने का अवसर मिले। इसी तरह बच्चे भी अपने चुने हुए बाबा-दादी के साथ पढ़ाई करेंगे, उन्हें पढ़ाएंगे और खेल-खेल में एक-दूसरे से सीखेंगे। इस पहल से बुजुर्गों के अनुभव बच्चों के काम आएंगे और बच्चों की ऊर्जा, जिज्ञासा तथा चंचलता बुजुर्गों के जीवन में खुशियों के नए रंग भर सकेगी।
हमारी उम्मीद मिशन की संचालिका अवंतिका तिवारी जरूरतमंद, मजदूर एवं वंचित परिवारों के बच्चों को निःशुल्क पढ़ाई सहित शैक्षणिक सहयोग प्रदान करती हैं। जिलाधिकारी ने इसी मिशन से जुड़े बच्चों को वृद्धाश्रम के बुजुर्गों से जोड़ने की पहल की है, ताकि शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में सामाजिक संवेदनशीलता, सेवा, सम्मान और पारिवारिक मूल्यों की भावना भी विकसित हो सके।
जिलाधिकारी की यह पहल समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि बुजुर्गों को सम्मान और अपनत्व देना तथा बच्चों को संस्कारों से जोड़ना सामूहिक जिम्मेदारी है। जब बच्चे अपने चुने हुए दादा-दादी के साथ पढ़ेंगे, उन्हें पढ़ाएंगे और उनके अनुभवों से सीखेंगे, तो वृद्धाश्रम में परिवार जैसा वातावरण विकसित होने के साथ दो पीढ़ियों के बीच विश्वास और स्नेह का रिश्ता भी मजबूत होगा।

By Parvat Singh Badal (Bureau Chief Jalaun)✍️

A2Z News UP Parvat singh badal (Bureau Chief) Jalaun ✍🏻 खबर वहीं जों सत्य हो

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