होली के दिन वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्ग फिल्मी गानों पर झूमते नजर आए। वृद्धों ने बताया कि परिवार उन्हें साथ नहीं रखना चाहता था इसलिए उन्हें आना पड़ा, लेकिन अब उन्हें यहीं अच्छा लगने लगा है। आईटीआई में बने वृद्धाश्रम में 100 से अधिक बुजुर्ग रहते हैं। कुछ अपने परिवार को छोड़कर आए हैं तो कुछ को उनके परिवार ने छोड़ दिया है। यहां रहने वाले बुजुर्ग एक दूसरे को अपना परिवार मानते हैं और सुख-दुख में एक दूसरे के साथ खड़े रहते हैं। बुजुर्गों ने बताया कि यहां उन्हें किसी प्रकार की समस्या नहीं है।
यह बोले बुजुर्ग
मैं 82 साल का हूं। पहले भाई के परिवार के साथ मथुरा में रहते थे। लेकिन उसकी पत्नी की मेरे कारण लड़ाई होती थी, इसलिए पिछले एक साल से वृद्धाश्रम में हूं। व्यापार के लिए मथुरा से झांसी आए थे। आर्मी में खाने के सामान की सप्लाई करते थे। नुकसान होने के कारण व्यापार बंद हो गया। दो बेटों में एक खत्म हो गया और दूसरे ने दिल्ली में शादी कर ली। उसकी और मेरी नहीं पटी। इसलिए यहां रह रहा हूं।– भीम शर्मा
करीब 80 साल की हूं। शादी होने के कुछ समय बाद ही पति ने घर से निकाल दिया और दूसरी शादी कर ली। कुछ वर्षों तक मजदूरी करती रही। एक भाई है, वह भी मजदूरी करता है। उसके साथ बहुत समय तक रही। मजदूरी करने के कारण उसके परिवार को भी साथ रखने में परेशानी होती थी। बेटियों की शादी हो चुकी है। कभी-कभार उनसे मिलने चली जाती हूं। अब वृद्धाश्रम ही उनका परिवार हो गया है।– शांति सेन
वृद्धाश्रम में झूमते बुजुर्ग…