महानगर की तमाम खस्ताहाल सड़कों को छोड़कर नगर निगम और लोक निर्माण विभाग सिर्फ एक ही सड़क बनाने में जुटे हैं। जिस सड़क को तीन महीने पहले नगर निगम ने बनाकर चमकाया, उसी सड़क को दोबारा बनाने में लोक निर्माण विभाग ने 17.55 लाख रुपये खर्च कर डाले। एक ही सड़क पर दोनों विभागों ने कुल 42.82 लाख रुपये खर्च कर डाले। अब यह मामला सामने आने से दोनों महकमों में खलबली मची है। अफसर एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
दोनों विभाग एक दूसरे को बता रहे जिम्मेदार
वार्ड संख्या 32 पिछोर के अंतर्गत मां पीतांबरा मिष्ठान से प्राथमिक विद्यालय तक 8.40 लाख, एग्जाम ट्रिप सेंटर से मनोज आटा चक्की के बीच सड़क सुधार का काम 8.43 लाख एवं रेड क्लिक लैब से माता मंदिर होते हुए लक्ष्मी हार्डवेयर के आगे तक हॉट मिक्स प्लांट के जरिये 8.43 लाख रुपये से नगर निगम ने काम कराया जबकि कागजों में इस सड़क का स्वामित्व लोक निर्माण विभाग के पास है। इसके बावजूद बजट की तंगहाली बताने वाले नगर निगम ने यहां करीब 25.27 लाख रुपये खर्च कर डाले। इस सड़क का निर्माण होते ही लोक निर्माण विभाग को भी इसकी याद आई। उसने भी आनन-फानन अप्रैल में डामरीकरण के नाम पर 17.55 लाख रुपये खर्च कर दिए। इस चमचमाती सड़क पर लोक निर्माण विभाग ने करीब तीन सेंटीमीटर मोटी तारकोल की परत बिछा दी। अब यह मामला सामने आने से दोनों महकमे एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
इनका यह है कहना
इस सड़क का रखरखाव एवं मरम्मत कार्य भले ही लोक निर्माण विभाग के पास हो लेकिन उनके अभियंताओं को देखना चाहिए था कि जो सड़क कुछ महीने पहले बनी, उसे दोबारा न बनाया जाए। नगर निगम की इसमें गलती नहीं है। लोक निर्माण विभाग को पैसा नहीं खर्च करना चाहिए था। नीना सिंह, प्रभारी मुख्य अभियंता, नगर निगम
यह सड़क लोक निर्माण विभाग की है। पीडब्ल्यूडी इसकी देखरेख करता है। नगर निगम अपनी सड़कों को छोड़कर बिना सूचना दिए इस तरह से काम करा रहा है। नगर निगम ने ऐसी कोई सूचना भी नहीं दी। लोक निर्माण विभाग की हर सड़क की निश्चित समय पर मरम्मत कराई जाती है, उस लिहाज से काम कराया गया। रजनीश गुप्ता, अधिशासी अभियंता एवं नोडल अधिकारी, लोक निर्माण विभाग
