अल नीनो का प्रभाव 10 साल बाद फिर से मौसम पर पड़ा है। जिसके कारण तापमान में तेजी से बृद्धि हो रही है। बुंदेलखंड में गर्मी दिन-ब-दिन विकराल होती जा रही है। बुधवार को जिले का अधिकतम तापमान 45.9 डिग्री और न्यूनतम 29.5 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। सुबह से ही सूरज ने आग उगलना शुरू कर दिया। दिन ही नहीं, रात में भी गर्म हवाओं ने लोगों को बेचैन रखा। मौसम विभाग का अलर्ट जारी है और झांसी समेत पूरा बुंदेलखंड हीट वेव के रेड जोन में है।

अल नीनो प्रशांत महासागर में होने वाली एक प्राकृतिक मौसमी घटना है, जिसमें समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इसके प्रभाव से मौसम का चक्र पूरी तरह से बदल जाता है। अल नीनो का सबसे बड़ा असर मानसूनी हवाओं पर पड़ता है। इससे मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं। जिसके कारण कम बारिश, सूखा पड़ने और भीषण गर्मी (हीट वेव) की स्थिति पैदा हो जाती है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. आदित्य प्रताप सिंह की माने तो ऐसा मौसम 2009 में आया था। उसके बाद अब 2026 में अल नीनो का प्रभाव देखने को मिल रहा है। इसके कारण भीषण गर्मी से धरती तप रही है। दोपहर 12 बजे बाद सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। गर्मी के कारण राहगीरों और यात्रियों के कंठ सूख गए। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन पर यात्री पानी की तलाश में भटकते दिखे। नौतपा 25 मई से शुरू होना है, लेकिन उससे पहले ही गर्मी ने तेवर दिखा दिए हैं। लोग नौतपा के नाम से ही सिहर रहे हैं। बुधवार को बांदा प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, वहीं प्रयागराज, हमीरपुर और झांसी में भी लू का असर रहा।

फसलों पर असर

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, तापमान 45 पार होते ही मूंग, उड़द और सब्जियों की फसलें झुलसने लगी हैं। खेतों में नमी खत्म होने से तिल और मूंगफली की बुवाई पिछड़ रही है। आम की फसल में फल गिरने की समस्या बढ़ गई है। तेज लू से फूल-मटर और भिंडी की पैदावार 30 फीसदी तक घटने की आशंका है।

पशु-पक्षियों पर संकट

तालाब-पोखर सूखने से पशुओं को पीने का पानी नहीं मिल रहा। गौशालाओं में मवेशी लू की चपेट में आ रहे हैं। पशु चिकित्सालय में डिहाइड्रेशन के केस बढ़े हैं।

लोगों की परेशानी

घरों में एसी ट्रिप हो रहे हैं, कूलर गर्म हवा फेंक रहे हैं। वोल्टेज फ्लक्चुएशन से फ्रिज-कंप्यूटर बंद हो रहे हैं। तेज गर्मी से मोबाइल हैंग हो रहे हैं, स्क्रीन पर ओवरहीट वार्निंग आ रही है। अस्पतालों में लू, डिहाइड्रेशन और उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या 40 फीसदी बढ़ गई है।



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