फर्जीवाड़ा करके आंतिया तालाब के पास की करोड़ों रुपये कीमत की सरकारी जमीन का बैनामा करने के आरोप में नगर निगम ने नौ लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोप है कि तालाब के नाम पर दर्ज नगर निगम की जमीन को भी फर्जीवाड़ा करके पहले वसीयत की गई। इसके बाद करोड़ों रुपये की इस जमीन का बैनामा कर दिया गया। पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है।
नगर निगम के लेखपाल राजीव राजपूत ने पुलिस को बताया कि आंतिया तालाब के पीछे नगर निगम के गाठा संख्या 88/1, 90/2, 92/1, 95, 96, 97, 98, 99, 101/1, 102/1, 124 व 141 समेत करीब दो हेक्टेयर भूमि खाली पड़ी है। आरोप है कि इन भूखंडों को निजी संपत्ति दर्शाकर अलग-अलग लोगों को बैनामा कर दिया गया। तहरीर के मुताबिक, पूर्व में उक्त भूमि गोपीचंद्र नामक व्यक्ति के नाम दर्ज थी, जिसे वर्ष 1999 में नगर पालिका परिषद के नाम दर्ज कर दिया गया था। वर्ष 2013 में गोपीचंद की मृत्यु के बाद वसीयत के आधार पर उनके पुत्र नीरज, धीरज और अरविंद सिंह ने भूमि पर दावा किया। वर्ष 2018 से 2025 के बीच अलग-अलग तिथियों में बैनामे किए गए।
इनमें पंचकुइया निवासी पंकज गुप्ता, ग्वालियर रोड निवासी आशीष अग्रवाल, डामर गोदाम निवासी अमित अग्रवाल, सीपी मिशन निवासी अब्दुल जहूर समेत अन्य के नाम पर प्लॉटों की बिक्री दिखाई गई जबकि यह सारे गाटे राजस्व रिकॉर्ड में तालाब की भूमि के रूप में दर्ज है। लेखपाल का कहना है कि इस जमीन को लेकर हाईकोर्ट से स्टे है। इसके बावजूद जमीन के बैनामे कराए गए। पुलिस ने खरीदार समेत बाबूलाल कारखाना निवासी नीरज, धीरज एवं राम सिंह के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की है। नवाबाद थाना प्रभारी रवि श्रीवास्तव के मुताबिक, मामले की छानबीन कराई जा रही है। इस मामले में अब तक कुल 17 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है।
