नगर निगम सदन की बैठक का पार्षदों की ओर से बहिष्कार करने के मामले में सत्ता पक्ष में तकरार बढ़ गई है। बीजेपी पार्षद दल के नेता नरेंद्र नामदेव ने बहिष्कार के लिए मेयर को ही जिम्मेदार बता दिया है। पार्टी जिला संगठन के जवाब मांगने पर अपना पक्ष रखते हुए नरेंद्र ने कहा कि स्वाभिमान की अवहेलना से पार्षदों में लंबे समय से आक्रोश पनप रहा था, जिसने बहिष्कार का रूप ले लिया।
सोमवार को नगर निगम में तय समय से आधे घंटे देर तक सदन की बैठक शुरू न होने पर पहले सत्ता पक्ष और फिर विपक्ष के पार्षदों ने बहिष्कार कर दिया था। उस समय महापौर बिहारी लाल आर्य अपने कक्ष में अधिकारियों और कुछ गिने-चुने पार्षदों के साथ मंथन कर रहे थे। ये बात पार्षदों को नागवार गुजरी और सभी सदन से उठकर नगर निगम गेट पर जाकर नारेबाजी करने लगे। मेयर के साथ बैठक कर रहे उपसभापति आशीष तिवारी और बीजेपी पार्षद दल के निवर्तमान नेता दिनेश प्रताप सिंह ने उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन अधिकतर पार्षदों ने उनकी बात को तवज्जो नहीं दी और प्रदर्शन जारी रखा। मामला पार्टी संगठन के संज्ञान में आया तो पार्षदों से जवाब मांग लिया गया।
पत्र में पार्षद दल के नेता ने ये लिखा
पार्षद दल के नेता नरेंद्र नामदेव ने पूरे घटनाक्रम का ठीकरा महापौर पर ही फोड़ दिया है। जिलाध्यक्ष को लिखे पत्र में नरेंद्र ने कहा कि नगर निगम में काफी समय से सभापति (मेयर) की कार्यशैली निष्क्रिय है। उनके समय से कार्यालय न पहुंचने से पार्षदों से संवाद नहीं हो पाता। पार्षदों द्वारा जनहित के कार्य के प्रस्ताव एवं समस्याओं के निराकरण को गंभीरता से नहीं लिया जाता है। पार्षदों के स्वाभिमान की अवहेलना और नगर निगम में व्याप्त अन्य जनहित के कार्य नहीं कराए जा पा रहे हैं। इससे पार्षदों में काफी समय से आक्रोश पनप रहा था। सोमवार को सदन की बैठक में पार्षद तय समय पर उपस्थित हो गए। काफी इंतजार करने के बाद नगर निगम के अधिकारी आए और कोई तवज्जो दिए बिना चले गए। वह सभापति के साथ अलग कक्ष में बैठ गए। यहां पार्षद बैठक का इंतजार करते रहे। पार्षदों की अवहेलना के कृत्य की पुनरावृत्ति होने से उनमें आक्रोश फैल गया। इसके बाद सामूहिक रूप से बैठक के बहिष्कार का निर्णय लेकर सभी पार्षद सदन कक्ष से बाहर आ गए।
पत्र लिखने की जानकारी नहीं, पार्टी पूछेगी तो पक्ष रखेंगे : मेयर
पार्षद दल के नेता की चिट्ठी पर मेयर बिहारी लाल आर्य से बात की गई तो बोले कि उन्हें पत्र लिखने की जानकारी नहीं है। अगर पार्टी पूछेगी तो वह अपना पक्ष रखेंगे। बताया कि अक्षय तृतीय पर पार्षदों की ओर से कई सामाजिक और पारिवारिक कार्यक्रम होने का हवाला दिया गया था। पार्षदों के अनुरोध पर ही सदन की बैठक स्थगित की गई थी। जल्द तिथि तय की जाएगी।
