रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय बुंदेलखंड में बांस को खेती और रोजगार से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। विश्वविद्यालय ने बांस दिवस पर अपने बैंबूसेटम में तीन प्रजातियों का पौधरोपण किया। इसका लक्ष्य कुल 15 बांस प्रजातियों को विकसित और संरक्षित करना है।
विश्वविद्यालय बांस की विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण, वैज्ञानिक उत्पादन और प्रसंस्करण पर काम कर रहा है। बैंबूसेटम में प्रजातियों के गुण, उत्पादन क्षमता और उपयोगिता का वैज्ञानिक अध्ययन हो रहा है। अधिष्ठाता उद्यानिकी एवं वानिकी मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि बांस आधारित कृषि वानिकी मॉडल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है। यह मॉडल टिकाऊ कृषि व्यवस्था के लिए भी उपयोगी भूमिका निभाएगा। विभागाध्यक्ष वानिकी एमजे डोबरियाल ने जानकारी दी कि बांस मिशन के तहत विश्वविद्यालय को एक प्रसंस्करण इकाई मिली है। यह इकाई बांस के मूल्य संवर्धन और उपयोगी उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देगी।
मिलेगी अतिरिक्त आय
यह प्रशिक्षण किसानों, ग्रामीण युवाओं, कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों को लाभान्वित करेगा। इसका उद्देश्य बांस आधारित रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना है। बांस आधारित कृषि वानिकी मॉडल किसानों को पारंपरिक खेती के साथ अतिरिक्त आय देगा। बैंबूसेटम में विकसित प्रजातियां भविष्य में अध्ययन और प्रशिक्षण का केंद्र बनेंगी। यह पहल बुंदेलखंड में ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देगी।
