करोड़ों रुपये की सट्टेबाजी के आरोप में पकड़े गए भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के कोषाध्यक्ष व सहकारिता बैंक के निदेशक आशीष उपाध्याय को शनिवार को पुलिस ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुन्नालाल की अदालत में पेश किया। न्यायालय ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इससे पूर्व उनकी ओर से बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने दलील दी, इससे करीब चार घंटे तक गहमागहमी का माहौल रहा। न्यायालय के बाहर बड़ी संख्या में समर्थक भी मौजूद रहे।

दिल्ली से किया गया था गिरफ्तार

आशीष उपाध्याय को शुक्रवार को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। शनिवार की दोपहर करीब 12:30 बजे उन्हें जनपद न्यायालय परिसर स्थित सीजेएम न्यायालय में पेश किया गया। इस दौरान उनकी ओर से अधिवक्ताओं ने न्यायालय में दलील दी कि आशीष का कृत्य संगठित अपराध नहीं है, इसलिए उन्हें राहत दी जाए, लेकिन अभियोजन अधिकारी नीरज सिंह ने तर्क दिया कि करोड़ों रुपये का आर्थिक अपराध किया गया है। यह संगठित अपराध की श्रेणी में आता है इसलिए हिरासत में भेजा जाना उचित रहेगा। इस आधार पर सीजेएम ने आशीष को 15 मई तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

जेल जाते वक्त बोले- न्यायालय पर भरोसा

अभियोजन अधिकारी ने बताया कि आशीष उपाध्याय पर 111(2) बीएनएस व जुआ अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जेल जाते वक्त आशीष ने कहा कि उन्हें प्रशासन व न्यायालय पर पूरा भरोसा है।

बड़ी संख्या में अधिवक्ता आए समर्थन में

भाजपा नेता को बचाने में बड़ी संख्या में अधिवक्ता सामने आए। अधिवक्ताओं ने एसएसपी को दिए ज्ञापन में उल्लेख किया है कि अधिवक्ता आलोक उपाध्याय के छोटे भाई आशीष भाजपा में जिम्मेदार पद पर हैं। वह पूरी निष्ठा से पार्टी के लिए काम करते हैं व सक्रिय कार्यकर्ता हैं। लिहाजा उनसे तमाम लोग जलन रखते हैं। उन्हें इस मामले में फंसाया गया है। सभी ने एसएसपी से निष्पक्ष विवेचना कराने की मांग की। ज्ञापन देने वालों में अधिवक्ता संजीव तिवारी, आरके शर्मा, लवलेश के शर्मा, सक्षम कुमार, दिशांत नायक, दीपांश पटेल, राजीव के अड़जरिया आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।



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