एरच/झांसी। बामौर ब्लॉक में बाल विकास परियोजना कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने के बहाने पकड़ा गया लिपिक धर्मेंद्र सिंह यादव सात-आठ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी ठग चुका। उनसे भी वह पांच-पांच लाख रुपये वसूल चुका। सोमवार को उसकी गिरफ्तार होने के बाद उसकी ठगी के खेल भी भंडाफोड़ हुआ। सीओ पीयूष पांडेय के मुताबिक आरोपी धर्मेंद्र की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में सामने आया कि उसने अपने कार्यालय में ही काम करने वालीं सात-आठ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी ठगी का शिकार बनाया। उनसे रिश्तेदारों को नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे ठगे गए।
थाना उल्दन के सेरिया गांव निवासी उमाशंकर ने बाल विकास परियोजना कार्यालय के लिपिक धर्मेंद्र सिंह यादव पर नौकरी दिलाने के नाम पर पांच लाख रुपये ठग लिए जाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उसने पुलिस को बताया कि भतीजे को कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने का झांसा देकर धर्मेंद्र ने 12 मार्च को पांच लाख रुपये लिए थे। उसके पास वीडियो रिकॉर्डिंग भी है। धर्मेंद्र ने एक महीने में नियुक्ति पत्र दिलाने का भरोसा दिया था। निर्धारित समय बीतने के बाद भी नौकरी नहीं मिली। उमाशंकर के रुपये वापस मांगने पर आरोपी उसे धमकाने लगा। उसकी तहरीर पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया था। पुलिस ने आरोपी को बामौर में काली माता मंदिर पास से भी गिरफ्तार भी कर लिया। सीओ पीयूष पांडेय के मुताबिक उसने कई अन्य लोगों से भी ठगी की है। उनसे भी शिकायती पत्र मिला है। इसकी जांच कराई जा रही है।
