झांसी। कोतवाली में तैनात एक दरोगा समेत चार सिपाहियों पर इवेंट ऑर्गनाइजर से छह लाख रुपये और दो मोबाइल फोन लूटने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पंचवटी कॉलोनी निवासी शारिक सिद्दीकी की तहरीर पर कोर्ट के आदेश के 42 दिन बाद शनिवार को कोतवाली में एफआईआर दर्ज हुई। हालांकि यह मामला पिछले साल नवंबर महीने का है।

शारिक का आरोप है कि नवंबर 2025 में सिपाही राजेश पाल, कपिल चाहर समेत दो अज्ञात सिपाहियों ने उसे रास्ते से उठाकर थाने लाया। यहां दरोगा राजेश अवस्थी के साथ मिलकर स्कूटी की डिकी में रखे छह लाख रुपये और दो मोबाइल फोन अपने पास रख लिए। आरोप है कि देर रात 20 हजार रुपये लेकर उसे छोड़ दिया गया, लेकिन छह लाख रुपये वापस नहीं किए गए।

शारिक के मुताबिक, करीब 10 दिन बाद वह रुपये वापस मांगने थाने पहुंचा तो उसे लॉकअप में बंद कर दिया गया। बाद में उसे साइबर फ्रॉड के एक मामले में जेल भेज दिया गया। पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद पुलिस महकमे में चर्चा है।

रास्ते में स्कूटी रोककर थाने ले जाने का आरोप

शारिक ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि 12 नवंबर 2025 की शाम वह स्कूटी से घर जा रहा था। उनाव गेट बाहर दुल्हन वाटिका के पास कोतवाली के सिपाही राजेश पाल, कपिल चाहर और दो अज्ञात सिपाहियों ने उसकी स्कूटी रोक ली। आरोप है कि उसे जबरन कोतवाली ले जाया गया और स्कूटी की चाबी ले ली गई। स्कूटी की डिकी में छह लाख रुपये रखे थे।

शारिक का आरोप है कि सिपाही कपिल चाहर ने डिकी से रुपये निकालकर अपने पास रख लिए, जबकि राजेश पाल ने उसके दोनों मोबाइल फोन ले लिए। थाने पहुंचने पर दरोगा राजेश अवस्थी ने उससे छह लाख रुपये के बारे में पूछताछ की। उसने बताया कि रकम कारोबार के लिए रखी थी।

आरोप है कि दरोगा ने दबाव बनाकर सिपाही राजेश पाल के मोबाइल से उसके दो वीडियो बनवाए। एक वीडियो में उससे रुपये अपने होने की बात कहलवाई गई, जबकि दूसरे में यह कहलवाया गया कि उसके पास से कोई रुपया बरामद नहीं हुआ।

20 हजार रुपये लेकर छोड़ने का आरोप

शारिक के मुताबिक, देर रात उससे 20 हजार रुपये लेकर उसे छोड़ दिया गया और दोनों मोबाइल भी वापस कर दिए गए। उससे कहा गया कि छह लाख रुपये का सबूत लेकर आने पर रकम वापस कर दी जाएगी।

उसका आरोप है कि 22 नवंबर 2025 को वह दोबारा रुपये मांगने थाने पहुंचा तो पुलिसकर्मियों ने उसे लॉकअप में बंद कर दिया। उसकी जेब से 20,600 रुपये और दोनों मोबाइल फोन निकालने का भी आरोप लगाया है। दो दिन बाद उसे साइबर फ्रॉड के एक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

शारिक के परिजनों ने थाने पहुंचकर छह लाख रुपये और मोबाइल के बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि सामान मालखाने में जमा है। जेल से बाहर आने के बाद शारिक ने मालखाने में जानकारी की तो उसके मुताबिक छह लाख रुपये और दोनों मोबाइल वहां जमा नहीं मिले। इसके बाद उसने कोतवाली प्रभारी और एसएसपी को प्रार्थनापत्र देकर कार्रवाई की मांग की। कार्रवाई न होने पर उसने कोर्ट की शरण ली।

कोर्ट के आदेश के 42 दिन बाद दर्ज हुई एफआईआर

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधा यादव की कोर्ट ने 20 अगस्त को मामले की सुनवाई करते हुए दरोगा राजेश अवस्थी समेत चार सिपाहियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए थे। शारिक का आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने 42 दिन तक मामला दर्ज नहीं किया। शनिवार को आखिरकार आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। इस संबंध में एसपी सिटी प्रीति सिंह और सीओ सिटी प्रिया सिंह से पक्ष जानने के लिए फोन किया गया, लेकिन दोनों अधिकारियों ने फोन नहीं उठाया।



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