श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन आचार्य सत्यम श्रोतिया ने सुनाए भक्तिमय प्रसंग
मोंठ (झांसी)। कटरा बाजार स्थित श्री हनुमान जी मंदिर परिसर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन रविवार को श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। सुप्रसिद्ध भागवत कथा वाचक आचार्य सत्यम श्रोतिया महाराज ने श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रेरणादायी प्रसंगों का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, सदाचार और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
कथा के दौरान आचार्य सत्यम श्रोतिया महाराज ने धुंधकारी कथा, सुखदेव महाराज की कथा तथा भीष्म स्तुति के प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण एवं मार्मिक वर्णन किया। कथा वाचक ने धुंधकारी के जीवन प्रसंग के माध्यम से बताया कि मनुष्य को अपने जीवन में अधर्म, अहंकार और बुरे कर्मों का त्याग कर सदाचार एवं ईश्वर भक्ति को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करने वाला ज्ञान का अमूल्य स्रोत है।
उन्होंने सुखदेव महाराज के प्रसंग का वर्णन करते हुए भक्ति, वैराग्य और आध्यात्मिक ज्ञान की महत्ता पर प्रकाश डाला। कथा के प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को समझाया कि सांसारिक मोह-माया के बीच रहते हुए भी मनुष्य को परमात्मा का स्मरण करते हुए अपने कर्मों को धर्म और सत्य के अनुरूप करना चाहिए।
इसके बाद भीष्म स्तुति का प्रसंग सुनाया गया। कथा वाचक ने भीष्म पितामह के जीवन, उनके त्याग, धर्मनिष्ठा और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा का भावपूर्ण वर्णन किया। प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। मंदिर परिसर में भक्ति गीतों और जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
कथा के समापन पर विधिवत आरती की गई। इसके पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया गया।
कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ कथा का श्रवण किया। आयोजन में परीक्षित शीला हरगोविंद बिरथरे, पुजारी विष्णु शर्मा, मनमोहन लहरया, राजीव यादव , प्रमोद गुप्ता, हरि व्यास, गिरिराज किशोर टिकरिया, सुरेश दुबे, रानू पांडे, पत्रकार महेश मुद्गल, अजय कुशवाहा, ओ.पी. यादव, शिवम सोनी, संतोष ताम्रकार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
