3 साल पहले फर्जी शादी के कार्ड के सहारे हाईकोर्ट से हासिल कर ली थी 8 दिन की पैरोल

संवाद न्यूज़ एजेंसी

झांसी। हमीरपुर जेल में सजा काट रहे यशपाल यादव उर्फ यशपाल मैरी की जमानत अर्जी सत्र न्यायाधीश मोहम्मद नेयाज अहमद अंसारी की अदालत ने निरस्त कर दी। उसने 3 साल पहले बेटी की शादी के फर्जी कार्ड लगाकर हाईकोर्ट से 8 दिन की पैरोल हासिल कर ली थी। फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ होने पर उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। कोर्ट के सामने यशपाल ने जमानत याचिका प्रस्तुत की लेकिन, कोर्ट ने इसे मंजूर नहीं किया।

हत्या के प्रयास मामले में जेल में बंद यशपाल मैरी ने बाहर आने के लिए 2023 में अपनी बेटी की शादी का कार्ड बनवाकर उसे हाईकोर्ट के सामने पेश किया और शादी में शामिल होने के लिए पैरोल की मांग की। इस आधार पर हाईकोर्ट ने उसे 2 से 9 मई 2023 की पैरोल भी मंजूर कर दी। जांच के दौरान उसका यह फर्जीवाड़ा उजागर हो गया। उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। अब आरोपी यशपाल मैरी की ओर से जमानत के लिए सोमवार को सत्र न्यायालय में अर्जी दाखिल की गई थी। यशपाल ने खुद को बेकसूर बताया। जिला शासकीय अधिवक्ता (दांडिक) ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जमानत मिलने से न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन होगी। अभियोजन पक्ष के तर्क पर सहमति जताते हुए कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।

बता दें, हत्या के प्रयास के एक मामले के गवाह को गोली मारने के मामले में दोषसिद्ध होने के बाद से यशपाल मैरी जेल में बंद है। इसी दौरान उसने पैरोल के लिए फर्जीवाड़ा किया था।



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