स्मृति शेष : रानी मुखर्जी की मां का झांसी से था गहरा नाता, मोहम्मद रफी के साथ यहां गाए थे गीत

विवेक चतुर्वेदी

झांसी। मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर झांसी अभिनेत्री रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी के लिए सुकून का शहर था। कृष्णा मुखर्जी जब भी यहां आतीं, परिवार के बीच बिल्कुल सामान्य जिंदगी बिताती थीं। पूर्वजों के मंदिर में दर्शन से लेकर परिजनों के साथ समय बिताने और सिनेमा देखने तक, झांसी से उनकी कई आत्मीय यादें जुड़ी हैं। विगत दिवस मुंबई में उनके निधन के बाद झांसी से जुड़े उनके रिश्ते की ये यादें फिर ताजा हो गईं।

कृष्णा मुखर्जी के रिश्तेदार सिद्धार्थ चटर्जी के मुताबिक, वह अपने पति रामकिशोर मुखर्जी, बेटी रानी मुखर्जी और बेटे राजा के साथ झांसी आती थीं। रामकिशोर मुखर्जी रिश्ते में सिद्धार्थ के भतीजे लगते थे। कृष्णा पहली बार वर्ष 1981 में बिपिन बिहारी इंटर कॉलेज के शताब्दी समारोह में झांसी आई थीं। इस समारोह में उन्होंने प्रसिद्ध गायक मोहम्मद रफी और जसपाल सिंह के साथ गीत भी गाए थे। रानी मुखर्जी भी उस समय अपनी मां के साथ समारोह में मौजूद थीं।

हर साल खींच लाती थी झांसी

वर्ष 1981 में शुरू हुआ झांसी से यह जुड़ाव लंबे समय तक बना रहा। सिद्धार्थ बताते हैं कि वर्ष 2015 तक कृष्णा लगभग हर साल झांसी आती रहीं। यहां आकर वह किसी फिल्मी सितारे की मां के रूप में नहीं, बल्कि परिवार की सदस्य की तरह रहती थीं। घर में रहना, परिजनों के साथ समय बिताना और पूर्वजों के मंदिर में दर्शन करना उनकी झांसी यात्रा का हिस्सा रहता था।

वर्ष 2018 में पति रामकिशोर मुखर्जी के निधन और बाद में स्वास्थ्य खराब रहने के कारण उनका झांसी आना कम हो गया। सिद्धार्थ के मुताबिक, मुंबई की व्यस्त जिंदगी के बीच झांसी में उन्हें अलग तरह का सुकून मिलता था। उन्होंने बताया कि कृष्णा के साथ उनकी कई यादें जुड़ी हैं। एक बार दोनों ने डमरू सिनेमा में फिल्म खलनायक भी देखी थी। फिल्मों से कृष्णा मुखर्जी के परिवार का पुराना लगाव था, लेकिन झांसी में उनका जीवन बेहद सादा रहता था।

इस्कॉन मंदिर से भी जुड़ी है परिवार की याद

कृष्णा मुखर्जी के परिवार का झांसी के इस्कॉन मंदिर से भी खास जुड़ाव रहा। उनके पति रामकिशोर मुखर्जी ने वर्ष 2001 में सैंयर गेट स्थित इस्कॉन मंदिर के लिए करीब 19 हजार वर्गफीट जमीन दान की थी। इस्कॉन मंदिर के उपाध्यक्ष ब्रजजन रंजन ने इसकी पुष्टि की।

ब्रजजन रंजन के मुताबिक, जमीन दान किए जाने के समय कृष्णा मुखर्जी और रानी मुखर्जी भी मंदिर में मौजूद थीं। उस समय मंदिर का निर्माण चल रहा था और वहां कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे। इस तरह कृष्णा मुखर्जी की झांसी से जुड़ी यादों में परिवार, मंदिर और संगीत-तीनों की अपनी खास जगह रही। संवाद



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