झांसी। कुनबे पर कर्ज का बोझ था। वह कर्ज उतारने के लिए गांव से 1912 किमी दूर जाकर मजदूरी करने लगा। तीन महीने तक हाड़तोड़ मेहनत करके जब हाथ में 30 हजार रुपये जमा हुए तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहा।
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झांसी। कुनबे पर कर्ज का बोझ था। वह कर्ज उतारने के लिए गांव से 1912 किमी दूर जाकर मजदूरी करने लगा। तीन महीने तक हाड़तोड़ मेहनत करके जब हाथ में 30 हजार रुपये जमा हुए तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहा।
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