झांसी। पहूज नदी संरक्षण से जुड़े मूल आवेदन की 17 अगस्त को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ (नई दिल्ली) में सुनवाई हुई। इस दौरान आवेदक नरेंद्र कुशवाहा ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रस्तुत आख्या पर सवाल उठाए हैं। कहा कि आख्या वास्तविक स्थिति से परे है। इसमें कई महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने नहीं लाया गया है।
आवेदक ने अधिकरण को बताया कि मूल आवेदन में पहूज नदी के संबंध में जिन तथ्यों, निर्माण कार्यों और पर्यावरणीय प्रभावों को विस्तार से उठाया गया है, उनमें एमपीपीसीबी की आख्या में उनका पूर्ण एवं निष्पक्ष परीक्षण नहीं दिखाया है। मप्र के ग्रामीण यांत्रिकी विभाग निर्माण एजेंसी की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर तैयार आख्या को वास्तविकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। आख्या में कहा गया है कि उनाव के लोग यह चाहतें हैं कि नदी पर घाट बने और सुंदरीकरण हो। इसी आधार पर काम कराया जा रहा है। वहीं आवेदक नरेंद्र कुशवाहा का कहना है कि मूल आवेदन में उठाए गए वास्तविक तथ्यों, दस्तावेजों, जमीनी स्थिति और पर्यावरणीय मुद्दों को पुनः अधिकरण के समक्ष रखा जाएगा। साथ ही मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरह अन्य प्रतिवादियों के जवाब में यदि तथ्यात्मक विसंगति, तथ्य छिपाने अथवा वास्तविक स्थिति से अलग जानकारी सामने आती है तो उस पर बिंदुवार आपत्ति दर्ज कराई जाएगी।
आदेश में यह भी दर्ज है कि मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से दाखिल जवाब में सूर्य मंदिर (बालाजी) ग्राम उनाव, जिला दतिया के पास पहूज नदी में चल रहे निर्माण कार्यों की जानकारी दी गई है। राज्य की ओर से प्रस्तुत जानकारी में दावा किया गया है कि निर्माण से नदी पर अतिक्रमण नहीं हुआ, पेड़ों की कटाई नहीं हुई तथा नदी के प्रवाह अथवा भूजल रिचार्ज पर प्रतिकूल प्रभाव की आशंका नहीं है। पंचायत सरपंच लक्ष्मण प्रसाद द्वारा दी गई जानकारी भी उल्लेख किया गया है।
265 किमी लंबी पहूज नदी के फ्लडप्लेन का भी मुद्दा
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अधिकरण को बताया गया कि करीब 265 किलोमीटर लंबी पहूज नदी में लगभग 195 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। नदी के फ्लडप्लेन के सीमांकन की प्रक्रिया चल रही है और रूपरेखा चित्रण का कार्य जून 2027 तक पूरा किए जाने की जानकारी दी गई। एनजीटी ने उत्तर प्रदेश में पहूज नदी के फ्लडप्लेन सीमांकन की प्रगति पर रिपोर्ट दाखिल करने की अनुमति दे दी है। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को है। आवेदक पक्ष का कहना है कि सभी प्रतिवादियों के जवाब रिकॉर्ड पर आने के बाद वह उनके जवाब का अध्ययन कर विस्तृत आपत्ति और तथ्यात्मक प्रत्युत्तर अधिकरण के सामने पेश किए जाएंगे।
