केजीएमयू में पकड़े गए फर्जी डॉक्टर हस्साम अहमद को पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद बुधवार को न्यायालय में पेश किया, जहां से कोर्ट ने आरोपी को जेल भेज दिया। आरोपी के मोबाइल फोन की छानबीन में कई छात्राओं से बातचीत के साक्ष्य मिले हैं जिनसे धर्मांतरण के रैकेट से उसके जुड़े होने की आशंका को बल मिला है। आरोपी व्हाट्सएप कॉल पर छात्राओं से बातचीत करता था।
आरोपी हस्साम अहमद के फोन में कई छात्राओं के फोन नंबर मिले हैं। व्हाट्सएप चैटिंग को देखते हुए पुलिस छात्राओं की सूची तैयार कर रही है। इसके बाद उनसे पूछताछ की जाएगी। यह पता लगाया जा रहा है कि पुराने लखनऊ में हस्साम अहमद की ओर से लगवाए गए स्वास्थ्य शिविर में कौन-कौन सी छात्राएं गई थीं। छात्राओं को शिविर में जाने के लिए किन लोगों ने कहा था। केजीएमयू के भीतर आरोपी के मददगारों की शिनाख्त भी की जा रही है। डीसीपी पश्चिम कमलेश दीक्षित के मुताबिक विवेचना में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
खंगाला जा रहा आरोपी की यात्रा का ब्योरा
पुलिस पता लगा रही है कि आरोपी ने किन-किन शहरों में यात्रा की है। वह कभी विदेश गया है या नहीं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि उसने पहले कितने लोगों के साथ फर्जीवाड़ा किया है। पुलिस ने पीड़ितों से सामने आकर अपनी शिकायत करने की अपील की है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस आरोपी को कस्टडी रिमांड पर भी ले सकती है। पुलिस ने आरोपी के परिवार के बारे में पता लगाकर परिजनों को घटना की जानकारी दे दी है।
आरोपी से चार घंटे पूछताछ
पुलिस ने आरोपी से चार घंटे पूछताछ की। इस दौरान उसके साथियों के बारे में जानकारी ली गई। पूछताछ में आरोपी के आठ करीबी डॉक्टरों के बारे में पुलिस को पता चला है। पुलिस सभी से पूछताछ की तैयारी कर रही है। आरोपी छात्राओं को बड़े अस्पतालों में नौकरी लगवाने का झांसा देकर अपने जाल में फंसाता था।
