– अवैध संबंधों के चलते हत्या कर दफना दिया था शव

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। युवक की हत्या के मामले में न्यायालय ने पिता-पुत्र समेत एक ही परिवार के चार सदस्यों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने महज 13 महीने बाद ही मामले में फैसला सुनाया है। घटना को अंजाम अवैध संबंधों के चलते दिया गया था। हत्या कर शव को एक खाली प्लॉट में दफना दिया गया था।

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र पांचाल ने बताया कि एरच के ग्राम गौंती निवासी जयराम ने सीपरी बाजार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि वह पिछले 15 साल से अपने परिवार के साथ ताज कंपाउंड में रह रहा है। उसका बेटा संतोष कुमार उर्फ गोलू (25) चार पहिया वाहन चलाने का काम करता है। 30 जून 2023 को संतोष घर से गाड़ी लेकर कानपुर जाने की बात कहकर निकला था। इसके बाद वह वापस नहीं आया।

इस पर दो जुलाई को उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई। इस बीच तीन जुलाई को साढ़ू राजकुमार ने बताया कि उसके भाई की ससुराल उरई में रामनगर ईदगाह के पीछे है। 30 जून 2023 की रात वहां मोहल्ले में रहने वाली एक महिला से मिलने झांसी का एक युवक पहुंचा था। महिला के परिवार के लोगों ने युवक के साथ मारपीट कर उसे कमरे में बंद कर दिया था। अगले दिन अल सुबह वे लोग युवक को एक सफेद रंग की कार में बैठाकर झांसी की ओर ले गए थे।

इसी बीच संतोष के दोस्त राहुल मिश्रा ने बताया था उसने एक जुलाई को मेडिकल कॉलेज बाईपास के पास संतोष को एक सफेद रंग की कार में बैठे देखा था। उसके साथ तीन लोग और थे। इस पर युवक के पिता ने पिछोर निवासी रामस्वरूप, उसके बेटे मयंक, पारीछा निवासी भतीजे शरद व अन्य पर संतोष की हत्या का शक जाहिर किया था।

पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें सामने आया कि उन्होंने संतोष की हत्या कर उसका शव पिछोर में गड्ढा खोदकर खाली पड़े एक प्लॉट में दफना दिया। पुलिस ने छह जुलाई को संतोष का शव बरामद कर लिया था। घटना में शामिल पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

अपर सत्र न्यायाधीश विजय कुमार वर्मा-प्रथम की अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद चार अभियुक्त रामस्वरूप, उसके बेटे मयंक श्रीवास, भतीजे शरद कुमार व उरई रामनगर निवासी दामाद अवधेश कुमार को हत्या में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा 20-20 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया, जिसकी अदायगी न करने पर अभियुक्तों को एक-एक साल का कारावास अतिरिक्त भुगतना होगा। इसके अलावा अन्य धाराओं में भी सजा सुनाई। जबकि, एक अन्य अभियुक्त जालौन के मोहल्ला धुआंताल निवासी दीपक को एक साल के कारावास की सजा सुनाई।

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उच्च न्यायालय ने एक साल में फैसला देने के दिए थे निर्देश

एडीजीसी देवेंद्र पांचाल ने बताया कि मुकदमे के दौरान अभियुक्त मयंक ने उच्च न्यायालय में जमानत अर्जी दाखिल की थी। न्यायालय ने उसे खारिज करते हुए एक साल में मुकदमे की सुनवाई पूरी करने के निर्देश दिए थे। उच्च न्यायालय के निर्देश पर एसएसपी ने मुकदमे की हर तारीख पर गवाह को पेश करने के निर्देश दिए थे। मुकदमे में 17 गवाहों की गवाही हुई। पुलिस ने अक्तूबर माह में आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। नौ फरवरी को यह मामला सेशन कोर्ट से अपर सत्र न्यायालय में ट्रांसफर हुआ था। इसके बाद न्यायालय ने 13 फरवरी को आरोप तय कर दिए थे। यही सब वजह रहीं कि महज एक साल पुराने मामले में न्यायालय की ओर से फैसला सुना दिया गया।

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पिता बोला, बेटे के कातिलों को मिली सही सजा

अदालत का फैसला आने के बाद मृतक संतोष के पिता जयराम ने कहा कि उसके इकलौते बेटे के कातिलों को एकदम सही सजा मिली है। साथ ही कहा कि उसे भरोसा नहीं था कि इतने कम समय में न्याय मिल जाएगा। न्यायालय के फैसले से तसल्ली मिली है। बता दें कि मृतक अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी कुछ माह पूर्व ही शादी हुई थी। परिवार में दो बहनें भी हैं। मृतक पर ही अपने परिवार की पूरी जिम्मेदारी थी।



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