लखनऊ। कुकरैल में प्रस्तावित नाइट सफारी की योजना एक बार फिर कानूनी सवालों के घेरे में आ गई है। राजधानी के पर्यावरणविद आलोक सिंह ने इसके खिलाफ केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में उन्होंने कहा कि पहले जिस प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी ली गई थी उसमें चिड़ियाघर, चार लेन की सड़क और एडवेंचर जोन शामिल थे। अब ये तीनों हिस्से हट चुके हैं।

ऐसे में अब सिर्फ बची नाइट सफारी को पुराने प्रोजेक्ट का हिस्सा मानना उचित नहीं होगा। नाइट सफारी को पुराने प्रोजेक्ट की मंजूरियों के सहारे बढ़ाने के बजाय नई योजना बनाकर नए सिरे से जरूरी मंजूरियां ली जानी चाहिए। आलोक सिंह ने सीईसी से व्यक्तिगत सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि नई मंजूरियां और सुरक्षा उपाय पूरे होने तक टेंडर, निर्माण और पेड़ कटान न किया जाए। उन्होंने पूरे कुकरैल वन क्षेत्र की दोबारा वैज्ञानिक पैमाइश और पेड़ों की जियो-टैगिंग की भी मांग की है।

पुरानी योजना के तीन बड़े हिस्से हुए थे खारिज

मूल योजना में चिड़ियाघर को दूसरी जगह ले जाना, चार लेन की सड़क और एडवेंचर जोन शामिल था। सीईसी ने इन तीनों हिस्सों को खारिज कर दिया था। राज्य सरकार ने इन फैसलों को स्वीकार किया है। 15 जुलाई के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी इसका उल्लेख है। आलोक सिंह के मुताबिक बची नाइट सफारी का कभी अलग से आकलन नहीं हुआ।

एक ही योजना में थे चिड़ियाघर और नाइट सफारी

मूल 390.75 एकड़ की योजना में 181.85 एकड़ नाइट सफारी और 208.9 एकड़ चिड़ियाघर के लिए था। पशु चिकित्सा केंद्र, प्रशासनिक भवन, कर्मचारियों के आवास और रसोई जैसी सुविधाएं भी शामिल थीं। चिड़ियाघर और सड़क हटने के बाद योजना का स्वरूप ही बदल गया है। अधिवक्ता आलोक सिंह के मुताबिक पूरे प्रोजेक्ट के लिए 3510.57 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी मिली थी। इसमें खारिज हो चुकी सड़क के लिए 364.06 करोड़ शामिल थे। 855.07 एकड़ जमीन के आवंटन का भी प्रावधान था। सिंह का कहना है कि अब प्रोजेक्ट बदल चुका है। ऐसे में कितनी जमीन चाहिए और कितना पैसा लगेगा इसका नए सिरे से हिसाब होना चाहिए।

रिजर्व फॉरेस्ट में नाइट सफारी के नियम भी जांचे जाएं

सिंह ने केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की 2025 की नाइट सफारी गाइडलाइन का हवाला दिया। उनका कहना है कि इसमें वन भूमि का इस्तेमाल करने वाली नाइट सफारी को मंजूरी देने पर रोक है। कुकरैल 1950 से अधिसूचित रिजर्व फॉरेस्ट है। उन्होंने पर्यावरण मंजूरी के लिए जमा फॉर्म-1 और 1ए में दी गई जानकारियों में भी अंतर बताया है।

छिपाई गई घड़ियाल पुनर्वास केंद्र की बात

कुकरैल वन में स्थित घड़ियाल पुनर्वास केंद्र को राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने जैव विविधता विरासत स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया है। इसके बावजूद सच्चाई को छिपाते हुए आवेदन में 15 किमी के दायरे में किसी संवेदनशील प्रजाति के प्रजनन क्षेत्र न होने की बात कही गई।



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