रेउसा/सीतापुर। सरयू के जलस्तर में इजाफा देख तटीय क्षेत्र के बाशिंदे सुरक्षित स्थानों पर ठिकाना बनाने में जुट गए हैं। इनका कहना है, कि अचानक बाढ़ आने पर घर से पलायन करना पड़ेगा। ऐसे में परिवार समेत कहां आसरा लेंगे और इधर-उधर भटकना भी पड़ेगा। पहले से ठिकाना बना लेंगे तो बाढ़ आने पर ज्यादा दिक्कत नहीं होगी।
ब्लॉक रेउसा क्षेत्र में हर साल सरयू में बाढ़ आने पर सैकड़ों गांव प्रभावित होते हैं। सबसे पहले तटवर्ती गांव गार्गीपुरवा, संबारी पुरवा, कटैला पुरवा, मरेली, जेतहिया, श्रीरामपुरवा, चौकीपुरवा आदि बाढ़ की जद में आते हैं। मानसून की दस्तक के बाद रविवार से सरयू का जलस्तर धीमी गति से बढ़ने लगा है।
ऐसे में तटीय इलाके के बाशिंदे अभी से तैयारियों में जुट गए हैं। सोमवार को श्याम नगर निवासी नंदराम निषाद सीतापुर-बहराइच हाईवे के किनारे अस्थाई बसेरा बनाने के लिए छप्पर व आसपास लगाने के लिए बांस व फूस की टटिया बांध रहे थे। पूछने पर बोले सरयू का जलस्तर बढ़ने लगा है। बारिश के दौरान ही बाढ़ आती है। बाढ़ कब कितने समय आ जाए कुछ पता नहीं। इसलिए अभी आशियाने के प्रबंध में जुटा हूं।
ग्रामीणों ने बताया कि हर साल बाढ़ आने पर सैकड़ों लोग बेघर हो जाते हैं। उन्हें खुले आसमान तले गुजर-बसर करनी पड़ती है। अचानक बाढ़ आने पर शासन-प्रशासन की मदद भी नहीं मिल पाती है। इसलिए लोग बाढ़ के समय आने वाली मुश्किलों से निपटने के लिए पहले से अपनी तैयारियां करने लगे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि अभी बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं हैं, लेकिन अपनी तरफ से सारी तैयारी कर लेंगे तो कम परेशानी होगी। इसलिए सरयू के किनारे बसे गांवों के लोग ऊंचे सुरक्षित स्थानों पर अपना अस्थाई आशियाना बना रहे हैं।
सभी विभाग अलर्ट मोड पर
बाढ़ कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए गए हैं। सिंचाई से लेकर स्वास्थ्य तक समस्त विभागों को अलर्ट कर दिया गया है। जल्द ही पीएसी के जवान भी तराई इलाके में पहुंचकर डेरा डाल देंगे। पर्याप्त नावों की व्यवस्था कर ली गई है। बाढ़ से निपटने को सारी तैयारियां पूरी हैं। बहरहाल, अभी बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं हैं।
– पीएल मौर्य, एसडीएम बिसवां
