
स्नान के बाद दान करने की परंपरा है।
विस्तार
मकर संक्रांति का पर्व सोमवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं. धीरेन्द्र पांडेय और एसएस नागपाल के मुताबिक, संक्रांति सोमवार को सुबह 8:15 बजे से लग रही है और फिर दिनभर इसका मान रहेगा। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के बाद पुण्यकाल प्रारंभ होगा। इस दिन प्रातः स्नान दान का विशेष महत्व है। सुबह सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास खत्म होगा और सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। बीते कुछ समय से मांगलिक कार्य नहीं हो रहे थे।
ये है दान का शुभ समय
वैदिक ज्योतिष शोध परिषद के अध्यक्ष महामहोपाध्याय डॉ. आदित्य पांडेय व ज्योतिषाचार्य धीरेन्द्र पांडेय के मुताबिक, वैदिक ज्योतिष में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी को 7 बजकर 15 मिनट से शाम 5:46 बजे तक है। इस दौरान पूजन-दान और सूर्योपासना विशेष फलदायी होगी। इस बार 14 को सूर्य धनु राशि में ही हैं। यह अगले दिन सुबह 8:30 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे, इसी के बाद पुण्य काल शुरू होगा। साथ ही इसी दिन खरमास खत्म होगा और शुभ काम शुरू होंगे।
पहले 12 और 13 को होती थी संक्राति
डॉ. आदित्य पांडेय कहते हैं कि वेंकटेश्वर व शताब्दी पंचांग के मुताबिक, 14 जनवरी को मकर संक्रांति पहली बार 1902 में मनाई गई थी। 18वीं शताब्दी में 12 और 13 जनवरी को मनाई जाती थी। 1664 में संक्रांति पहली बार 15 जनवरी को मनाई गई थी। इसके बाद हर तीसरे साल अधिकमास होने से दूसरे व तीसरे साल 14 को, चौथे साल 15 जनवरी को संक्रांति होने लगी। हालांकि तारीख तय होने के बावजूद दो दिन पर्व पड़ने से लोगों में काफी असमंजस रहा है बीते वर्षों में। इस बार ऐसा कोई असमंजस नहीं है।
