– रेजिडेंट डॉक्टरों ने नारेबाजी करके बंद कराए पर्चे बनने के काउंटर, सिर्फ 117 रोगियों को मिला उपचार

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– इमरजेंसी में भी समुचित उपचार नहीं, पलायन कर रहे मरीज

अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से बेपटरी हो गई हैं। मंगलवार को ओपीडी के सिर्फ 117 पर्चे बन सके, तभी आंदोलित डॉक्टरों ने काउंटर बंद कराकर नारेबाजी शुरू कर दी। रक्षाबंधन की वजह से दोपहर 12 बजे तक चलने वाली ओपीडी रोगियों के नहीं होने पर पूर्वाह्न बंद हो गई। वहीं, इमरजेंसी में समुचित उपचार नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए रोगियों को परिजन दूसरी जगह ले गए।

कोलकाता में महिला डॉक्टर की निर्ममता से हुई हत्या के विरोध में रेजिडेंट डॉक्टर 13 अगस्त से बेमियादी हड़ताल पर हैं। सोमवार को रक्षाबंधन की वजह से दोपहर 12 बजे तक ओपीडी चलनी थी। 117 पर्चे बनने के बाद ही रेजिडेंट डॉक्टर ने पहुंचकर काउंटर बंद कराए और वहीं बैठकर नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद सभी एकजुट होकर इमरजेंसी पहुंचे।

वहीं, दूसरी तरफ इमरजेंसी में रोगियों को समुचित उपचार नहीं मिलने के मामले सामने आने लगे हैं। मऊरानीपुर के गांव एउनी निवासी ओमकार रविवार रात 12 बजे घायल अवस्था में इमरजेंसी पहुंचा। सोमवार को दोपहर 11 बजे एक्स-रे हुआ। मेडिकल कर्मियों ने बताया हड्डी का ऑपरेशन होना है और डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से 10-15 दिन का समय लग सकता है। इस पर परिजन उसे दूसरे जगह उपचार कराने ले गए।

वहीं, जालौन की उपासना अपनी मासूम बेटी का उपचार कराने के लिए सोमवार सुबह पांच बजे इमरजेंसी आई। डॉक्टरों ने उसे भर्ती कर लिया मगर समुचित उपचार नहीं मिला, जिससे मासूम की तबीयत बिगड़ गई। उपासना ने बताया कि यहां कोई डॉक्टर कुछ सुन नहीं रहे हैं।



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