अंतरराष्ट्रीय माहौल के कारण चुनौतियों में घिरे निर्यात और निर्यातकों के हित में उठाई गई मांग कुछ जिम्मेदारों को इतनी नागवार गुजरी कि इस सलाह के पैरोकार कारोबारियों को यंग एंटरप्रेन्योर सोसायटी (यस) से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। यस से जुड़े निर्यातकों को संस्था के व्हाट्सएप ग्रुप से भी बाहर कर दिया है।

यस के पूर्व नेशनल चेयरमैन विशाल अग्रवाल भी संस्था से किनारे किए गए लोगों में शामिल हैं। ईपीसीएच से की गई छूट की मांग पर यस का यह एक्शन तमाम निर्यातकों के गले नहीं उतर पा रहा। उनकी हैरानी इस बात पर भी है कि इतनी उठा-पटक के बावजूद ईपीसीएच के कर्णधार इस मामले में खुलकर बोलने से बच रहे हैं।

ग्रेटर नोएडा में 13 से 17 अक्तूबर के बीच आईजीएफ मेला आयोजित होना है। इसके लिए मेला आयोजक ईपीसीएच द्वारा स्टॉल और स्पेस की बुकिंग, निर्धारित शुल्क जमा करने जैसी औपचारिकताएं पूरी कराई जा रही हैं।

इस बीच यस के पूर्व नेशनल चेयरमैन विशाल अग्रवाल ने पश्चिम एशिया के युद्ध से बिगड़ी निर्यात और निर्यातकों की स्थिति का हवाला देते हुए स्थान की बुकिंग में नरमी और रियायत की मांग की थी। ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक (ईडी) राजेश रावत को विशाल समेत कुछ अन्य निर्यातकों ने पत्र भेजा था।

इसमें मेले में स्थान के लिए एडवांस जमा राशि घटाकर 10 हजार रुपये करने का सुझाव दिया था। कहा था कि स्टॉल आवंटन के बाद 30 सितंबर तक बाकी राशि जमा कराई जाए। स्टॉल का किराया 8750 रुपये प्रति वर्गमीटर से घटाकर 5000 रुपये प्रति वर्गमीटर करने की भी मांग थी।

विशाल का कहना है कि हमारी यह मांग एमएचईए के पदाधिकारियों को पसंद नहीं आई। नाराज लोगों ने उन्हें और कई सदस्यों को यस तथा उसके व्हाट्सएप ग्रुप से हटा दिया। विशाल के मुताबिक नदीम खान, नबील अहमद, काजी शौकत, शफात अहमद, मोहम्मद नाजिम को भी किनारे कर दिया गया है।



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