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लखनऊ। सिकंदरबाग इलाके के दो बड़े भूखंडों की मूल और डुप्लीकेट दोनों फाइलें गायब होने के करीब 45 साल पुराने मामले की एसआईटी जांच के घेरे में एलडीए के 50 से अधिक कर्मचारी व अधिकारी आ रहे हैं। इसमें वे अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं जो वर्ष 1978 से 1994 के बीच नजूल विभाग में तैनात रहे हैं। इनमें नजूल अधिकारी, तहसीलदार, लेखपाल, अमीन व सर्वेयर शामिल हैं। पहली बार में एलडीए ने करीब 20 अधिकारियों-कर्मचारियों की सूची भेजी है और दूसरी बार में करीब 30 की भेजने की तैयारी है। यह भी चर्चा है कि उस समय नजूल अनुभाग में तैनात रहे ज्यादातर अधिकारी-कर्मचारी रिटायर्ड हो चुके हैं। कई दिवंगत भी हो चुके हैं।

एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया सिकंदरबाग इलाके में नजूल के दो भूखंडों की मूल फाइल गायब हो गई तो उसकी डुप्लीकेट फाइल खोली गई, लेकिन वह भी गायब हो गई। नजूल के इन भूखंडों का एरिया करीब पांच बीघा है। एसआईटी ने गायब फाइलों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के विवरण एलडीए से मांगे हैं। मामले की जांच के लिए प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन अनिल कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी गठित है। इसमें आईजी रेंज भी शामिल हैं।



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