मुजफ्फरनगर। (Muzaffarnagar) ग्राम पचैण्डा कलॉ की एक डॉक्टर और पूर्व ग्राम प्रधान पद की प्रत्याशी ने मौजूदा ग्राम प्रधान पर भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और परिवार को प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉ. मोनिका सिंह, जो पहले भी ग्राम प्रधान पद के चुनाव में खड़ी हो चुकी हैं, ने एक प्रेसवार्ता के दौरान खुलासा किया कि वर्तमान ग्राम प्रधान धर्मेंद्र ने जालसाजी करके जाति प्रमाण पत्र बनवाया और इसी के आधार पर चुनाव जीता।
तीन बार निरस्त हो चुका है प्रमाण पत्र, फिर भी कैसे बना हुआ है प्रधान?
डॉ. मोनिका सिंह ने बताया कि जिला स्तरीय समिति ने तीन बार धर्मेंद्र का जाति प्रमाण पत्र निरस्त किया है, लेकिन वह अभी भी सत्ता पर काबिज है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र ने “जुलाहा (कोरी जाति)” का झूठा प्रमाण पत्र बनवाकर चुनाव लड़ा, जबकि उसकी असली जाति कुछ और है। यह मामला सिर्फ उनके गाँव तक सीमित नहीं है – बागपत जिले के ग्राम पंचायत लोयन में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जहाँ जिलाधिकारी ने फर्जी प्रमाण पत्र की जांच के बाद प्रधान को पद से हटा दिया था।
परिवार को धमकियाँ और झूठे मुकदमों का खतरा
इस मामले में डॉ. मोनिका सिंह के पति युधिष्ठिर पहलवान ने भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्राम प्रधान उनके परिवार को लगातार धमकी दे रहा है और झूठे मामलों में फंसाने की धमकी भी दी जा रही है। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की कि धर्मेंद्र के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए और उसे पद से हटाया जाए।
क्या है पूरा मामला? गाँव में क्यों चल रहा है विवाद?
सूत्रों के अनुसार, ग्राम पचैण्डा कलॉ में पिछले कुछ समय से राजनीतिक तनाव चल रहा है। डॉ. मोनिका सिंह ने पहले भी ग्राम प्रधान पद का चुनाव लड़ा था, लेकिन धर्मेंद्र ने जाति प्रमाण पत्र में गड़बड़ी करके चुनाव जीता। अब जबकि उनका प्रमाण पत्र निरस्त हो चुका है, फिर भी वह पद पर बना हुआ है, जिससे गाँव के लोगों में आक्रोश है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब तीन बार प्रमाण पत्र निरस्त हो चुका है, तो प्रशासन ने अभी तक धर्मेंद्र को पद से क्यों नहीं हटाया? क्या यह सत्ता के गलियारों में चल रही सांठगांठ का नतीजा है? ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई, तो गाँव में और अशांति फैल सकती है।
क्या होगा अगला कदम?
डॉ. मोनिका सिंह और उनके परिवार ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई है कि धर्मेंद्र के खिलाफ तुरंत जांच शुरू की जाए और उसका प्रमाण पत्र रद्द करके उसे पद से हटाया जाए। साथ ही, परिवार को मिल रही धमकियों की भी जांच होनी चाहिए।
यह मामला सिर्फ एक गाँव तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों में फर्जीवाड़े की बढ़ती घटनाओं को उजागर करता है। अगर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो ऐसे मामले और बढ़ सकते हैं।