इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय से गायब छात्र को सात अक्तूबर 2025 को कोर्ट में हाजिर करने के लिए पुलिस को आदेश दिया है। साथ ही कहा है कि अपर शासकीय अधिवक्ता अगली तारीख पर बताएंगे कि क्यों ने छात्र को मुक्त किया जाए। कोर्ट ने सुनवाई के लिए सात अक्तूबर की तिथि नियत की है। यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय व न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ ने आफताब आलम व अन्य की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया।

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि याची सोनभद्र के थाना घोरावल, ग्राम बिसरेखी का रहने वाला है। याची का भतीजा इंतेखाबुल मुख्तार इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एमए का छात्र है और मुस्लिम छात्रावास कमरा नंबर 71 में रह रहा था। याची अफताब आलम 24 सितबर 2025 को प्रयागराज आए तो उन्हें पता चला कि इंतेखाबुल पिछले दो दिनों से गायब है। इसी दौरान एक फोन कॉल से उन्हें पता चला कि इंतेखाबुल जौनपुर के पुलिस थाना मुंगरा बादशाहपुर थाने में हिरासत में है। वह तुरंत थाना गए लेकिन उन्हें भतीजे से मिलने नहीं दिया गया।

इसी दौरान उन्हें भतीजे के साथ कुछ गलत होने की आशंका हुई। उन्होंने पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल भी किया। इसके बाद भी उन्हें कहीं से मदद न मिलने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की। याचिका में उप्र सरकार, पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त प्रयागराज, थाना प्रभारी कर्नलगंज, पुलिस अधीक्षक जौनपुर, थाना प्रभारी मुंगरा बादशाहपुर को प्रतिवादी बनाया गया है। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद इंतेखाबुल को हाईकोर्ट में हाजिर करने के लिए प्रतिवादियों को आदेश दिया।



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